जयपुर, 09 अगस्त। राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भजनलाल सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार आगामी 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश करने की तैयारी में है। समान सिविल संहिता प्रारूप समिति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को विधेयक का ड्राफ्ट सौंप दिया है। अब सरकार इसके कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी।
राजस्थान में UCC को लेकर प्रक्रिया 14 अप्रैल 2026 को उस समय आगे बढ़ी, जब राज्य मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता की दिशा में काम करने का फैसला किया। इसके बाद 6 मई को प्रारूप समिति का गठन किया गया। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति को राजस्थान की परिस्थितियों, विभिन्न समुदायों की परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर UCC का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
अब समिति द्वारा तैयार ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद सरकार इसकी कानूनी एवं संवैधानिक समीक्षा करेगी। इसके बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा और कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
प्रस्तावित UCC का दायरा केवल विवाह और तलाक तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। ड्राफ्ट में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने, भरण-पोषण और परिवार से जुड़े नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव बताया गया है।
इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि अंतिम प्रावधान क्या होंगे, यह विधेयक के विधानसभा में पेश होने और उसके बाद होने वाली चर्चा से स्पष्ट होगा।
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि इसी सत्र में UCC विधेयक को सदन के सामने रखा जाए। हालांकि विधेयक पेश होने से पहले सरकार द्वारा ड्राफ्ट की कानूनी और संवैधानिक समीक्षा की जाएगी।
UCC को लेकर विपक्ष ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने जनता के सामने UCC का मसौदा सार्वजनिक नहीं किया और अब विधानसभा में इसे पेश करने की तैयारी की जा रही है। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा है कि कांग्रेस सदन में विधेयक पर चर्चा करेगी और किसी भी चर्चा से पीछे नहीं हटेगी।
UCC विधेयक के विधानसभा में आने के साथ ही राजस्थान की राजनीति में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। सरकार इसे समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर आगे बढ़ा रही है, जबकि विपक्ष विधेयक की प्रक्रिया, प्रावधानों और उसके व्यापक प्रभावों पर सवाल उठा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 अगस्त से शुरू होने वाले मानसून सत्र में UCC का ड्राफ्ट किस रूप में विधानसभा के सामने आता है और उस पर सदन में क्या बहस होती है।
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