राजस्थान: के Sikar शहर में सड़क चौड़ीकरण की योजना को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर परिषद द्वारा प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के विरोध में स्थानीय लोग खुलकर सामने आ गए हैं। खासकर महिलाओं ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनके मकान तोड़े गए तो वे अपने बच्चों के साथ आत्महत्या करने तक को मजबूर हो जाएंगी।
यह मामला शहर के Purohit Ki Dhani, बसंत विहार और रामपुरा रोड क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है, जहां नगर परिषद ने सड़क को 40 फीट और कुछ स्थानों पर 60 फीट तक चौड़ा करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने हाल ही में कई जगहों पर मार्किंग भी कर दी है।
जैसे ही लोगों को सड़क चौड़ीकरण की योजना के बारे में जानकारी मिली, प्रभावित परिवारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
सोमवार को बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी नगर परिषद और जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि सड़क की चौड़ाई 40 फीट की बजाय 30 फीट ही रखी जाए ताकि लोगों के घर और दुकानें सुरक्षित रह सकें।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि अगर उनके घर तोड़े गए तो उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
प्रदर्शन में शामिल कई महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई से ये मकान बनाए हैं।
उनका कहना था कि यदि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उनके घरों को तोड़ा गया तो वे अपने बच्चों के साथ आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को विकास के साथ-साथ लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।
नगर परिषद की योजना के अनुसार Police Line तिराहे से Radhakishanpura होते हुए Jaipur-Jhunjhunu Bypass तक जाने वाली सड़क को 40 फीट चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है।
इसके लिए प्रशासन की ओर से नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग नहीं है, बल्कि एक रेजिडेंशियल कॉलोनी की सड़क है। ऐसे में इसे 40 फीट चौड़ा करने की जरूरत नहीं है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण की योजना लागू होने पर इलाके के कई मकान और दुकानें पूरी तरह से टूट सकती हैं।
कुछ मकानों का आधा हिस्सा भी टूटने की आशंका है, जिससे वहां रहने वाले परिवारों के सामने गंभीर आवास संकट खड़ा हो जाएगा।
लोगों का कहना है कि अधिकतर परिवार मध्यम और निम्न वर्ग से हैं और उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक जगह भी नहीं है।
सड़क चौड़ीकरण से केवल मकानों पर ही नहीं बल्कि कई लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।
इलाके में कई छोटी दुकानें और व्यवसाय चल रहे हैं। यदि सड़क चौड़ीकरण के कारण ये दुकानें हटाई गईं तो कई परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बसे इस मोहल्ले की सामाजिक संरचना भी इससे प्रभावित होगी।
प्रभावित लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की चौड़ाई को 40 फीट से घटाकर 30 फीट किया जाए।
उनका कहना है कि इससे सड़क का विकास भी हो जाएगा और लोगों के मकान भी सुरक्षित रह सकेंगे।
स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में कई स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि शामिल थे।
इनमें प्रमुख रूप से सुरेंद्र शर्मा, चंचल सैनी, सत्यनारायण सैनी, गिरधारी लाल शर्मा, सतीश सैनी, कुलदीप जोशी, रूपनारायण शर्मा, मंजू शर्मा, द्रोपदी देवी, कृष्णा सैनी, विमला जांगिड़, राजू शर्मा, शारदा देवी और सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे।
सीकर में सड़क चौड़ीकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है। जहां प्रशासन इसे शहर के विकास और ट्रैफिक सुधार के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं स्थानीय लोग अपने घरों और आजीविका को बचाने की मांग कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच इस मुद्दे का समाधान कैसे निकलता है।
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