दौसा: जिले के महवा उपखंड में स्थित कुतकपुर गांव में चरागाह भूमि पर 220 केवी ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) के निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार जारी है। ग्रामीण पिछले 176 दिनों से धरना देकर इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। रविवार को भी गांव के चामुंडा माता मंदिर परिसर में दर्जनों लोग धरने पर बैठे रहे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
यह विरोध Kutakpur गांव में प्रस्तावित 220 केवी जीएसएस के निर्माण को लेकर हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर यह परियोजना बनाई जा रही है, वह गांव की चरागाह भूमि है और वहां बिजली स्टेशन बनाना उचित नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार यह आंदोलन पिछले करीब छह महीने से लगातार चल रहा है।
धरनास्थल Chamunda Mata Temple परिसर में ग्रामीण प्रतिदिन एकत्रित होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
धरने में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
धरने में शामिल ग्रामीण नेता Gajraj Gurjar ने बताया कि मूल रूप से 220 केवी जीएसएस का प्रस्ताव Matasuda Khora क्षेत्र के लिए था।
लेकिन अब इस परियोजना को कुतकपुर की चरागाह भूमि पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि चरागाह भूमि गांव के पशुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है और वहां किसी तरह का निर्माण होने से पशुपालकों को भारी नुकसान होगा।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अब तक कई बार पंचायतें आयोजित की जा चुकी हैं।
इसके अलावा गांव के लोगों ने पैदल मार्च भी निकाले और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।
लेकिन इसके बावजूद अभी तक प्रशासन या सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
अब आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे क्षेत्र के विधायक के जनसुनवाई केंद्र के गेट पर प्रदर्शन करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
लगातार 176 दिनों से चल रहे धरने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जरूरतों और भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि जीएसएस किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बनाया जाए तो गांव की चरागाह भूमि भी सुरक्षित रहेगी और बिजली परियोजना भी पूरी हो सकेगी।
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करे और कोई ऐसा समाधान निकाले जिससे गांव के लोगों की समस्या भी हल हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं और प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहे हैं।
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