पश्चिम एशिया: में जारी युद्ध दिन-ब-दिन और खतरनाक रूप लेता जा रहा है। Iran और Israel के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को तनाव की चपेट में ले लिया है। मिसाइलों, ड्रोन हमलों और समुद्री टकराव के बीच यह संघर्ष अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है।
इस बीच Donald Trump की सख्त चेतावनियों और खाड़ी देशों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों को भी चिंतित कर दिया है। भारत समेत कई देशों ने हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है।
इस्राइली सेना के अनुसार ईरान ने देश की ओर कई मिसाइलें दागीं। सेना ने कहा कि मिसाइल हमलों को रोकने के लिए देश की वायु रक्षा प्रणालियों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया।
प्रभावित इलाकों में रहने वाले नागरिकों को तुरंत शेल्टर और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। सेना ने कहा कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और अगली सूचना तक नागरिकों को सतर्क रहने को कहा गया है।
इस्राइल की रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है, हालांकि कुछ इलाकों में विस्फोटों की आवाजें भी सुनी गईं।

ईरान की सेना ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके तेल और ऊर्जा ढांचे पर हमला किया गया तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी साझेदारी वाली ऊर्जा परियोजनाओं को निशाना बनाएगा।
ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे सभी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के Kharg Island के पास सैन्य गतिविधियों पर हमले का दावा किया था।
ईरान ने इसे सीधी उकसावे की कार्रवाई बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया था कि उसने खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।
हालांकि United States Central Command ने इस दावे को पूरी तरह झूठा करार दिया।
अमेरिकी सेना के अनुसार अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पूरी तरह सुरक्षित है और समुद्र से ईरानी हवाई क्षेत्र पर नजर रखते हुए अभियान चला रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Qatar ने एक संभावित मिसाइल हमले को नाकाम करने का दावा किया है।
कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार देश की सशस्त्र सेनाओं ने आने वाली एक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया।
इससे पहले सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर कुछ इलाकों को खाली कराया था और पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। बाद में खतरे का स्तर कम कर दिया गया।
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए नई शर्तों पर विचार कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सीमित जहाजों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है।
बताया जा रहा है कि यदि तेल व्यापार चीनी मुद्रा Chinese Yuan में किया जाता है तो अनुमति मिल सकती है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि वैश्विक तेल व्यापार का अधिकांश हिस्सा अब भी अमेरिकी डॉलर में होता है।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय ध्वज वाला गैस ले जा रहा जहाज INS Shivalik होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा है।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में मौजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोत पूरी तरह सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
जरूरत पड़ने पर जहाज को सुरक्षा देने के लिए नौसैनिक पोत स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।
खाड़ी क्षेत्र के एक अन्य देश Bahrain में सायरन बजने के बाद सरकार ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्रीय हालात को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
संघर्ष का असर Lebanon तक भी पहुंच गया है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस्राइल के हवाई हमले में दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए।
यह हमला एक संयुक्त मेडिकल पॉइंट पर हुआ जिसे स्थानीय राहत संगठन चला रहे थे। लेबनान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
भारत सरकार ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।
भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी काम करते हैं।
इसलिए भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना है।
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