Kerala: की राजनीति में पिछले 10 दिनों से चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। कांग्रेस ने गुरुवार को बड़ा ऐलान करते हुए वरिष्ठ नेता V. D. Satheesan को राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। चुनाव परिणाम आने के बाद से मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर लगातार बैठकों और मंथन का दौर चल रहा था। आखिरकार हाईकमान ने सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी।
कांग्रेस महासचिव दीपा दासमुंशी ने तिरुवनंतपुरम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि 7 मई को पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन, विधायकों और सहयोगी दलों की राय लेने के बाद सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय किया।
मुख्यमंत्री पद के ऐलान के बाद वीडी सतीशन ने भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पद उनके लिए कोई निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि “दैवीय कृपा” है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलेंगे। सतीशन ने खासतौर पर केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला का नाम लेते हुए कहा कि सभी नेताओं के सहयोग से सरकार चलाई जाएगी।
दरअसल, चुनाव नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए तीन बड़े नाम चर्चा में थे— वीडी सतीशन, K. C. Venugopal और Ramesh Chennithala। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हो गए थे। एक वर्ग सतीशन को नई पीढ़ी का मजबूत और आक्रामक चेहरा मान रहा था, जबकि दूसरा धड़ा वेणुगोपाल और चेन्निथला के समर्थन में था।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायकों की बैठक में ज्यादातर विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में दिखाई दिए थे। माना जा रहा था कि करीब 75 से 80 प्रतिशत विधायक उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। इसके बावजूद हाईकमान ने सतीशन पर भरोसा जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने जनाधार और विपक्षी राजनीति में सतीशन की सक्रियता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया।
मुख्यमंत्री चयन के दौरान केरल की राजनीति में पोस्टर वार भी देखने को मिला। वायनाड और अन्य शहरों में वीडी सतीशन के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। कुछ पोस्टरों में हाईकमान को चेतावनी देते हुए कहा गया था कि यदि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया गया तो इसका असर भविष्य के चुनावों पर पड़ सकता है। समर्थकों ने यहां तक लिख दिया कि “वायनाड अगला अमेठी बन जाएगा।”
इन पोस्टरों ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने लगातार यह संदेश देने की कोशिश की कि अंतिम फैसला सामूहिक सहमति से होगा। राहुल गांधी भी पूरी प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल रहे और उन्होंने अलग-अलग नेताओं से बातचीत की।
वीडी सतीशन के नाम के ऐलान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और जमकर जश्न मनाया। ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच कार्यकर्ताओं ने “सतीशन जिंदाबाद” के नारे लगाए।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी पार्टी के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि एक सच्चे कांग्रेसी के तौर पर वे हाईकमान के निर्णय के साथ हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उनसे राय मांगी थी और पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से पूरी हुई।
वहीं कांग्रेस सांसद Hibi Eden ने इसे “ऊर्जावान और सही फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि सतीशन ने पिछले 10 वर्षों से एलडीएफ सरकार के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी और जनता का विश्वास जीता।
केरल विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें कांग्रेस के खाते में 63 सीटें आईं। इस बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री चयन को लेकर पार्टी के भीतर गहन मंथन चल रहा था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वीडी सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस अब केरल में नई राजनीतिक दिशा देने की कोशिश करेगी। पार्टी को उम्मीद है कि सतीशन की साफ छवि और जनसंपर्क क्षमता सरकार को मजबूत बनाएगी।
केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर चला लंबा सस्पेंस अब खत्म हो चुका है। कांग्रेस ने आखिरकार वीडी सतीशन को राज्य की कमान सौंप दी है। हालांकि इस फैसले ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को भी उजागर किया है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सतीशन अपनी नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और क्या वे सभी गुटों को साथ लेकर स्थिर सरकार चला पाएंगे।
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