हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में छोटी दिवाली 7 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह लगभग 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह लगभग 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इस दौरान 7 नवंबर की शाम को छोटी दिवाली और यम दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी। वहीं सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि होने के कारण 8 नवंबर की सुबह अभ्यंग स्नान की परंपरा भी रहेगी।
धार्मिक अनुष्ठानों के समय में स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
छोटी दिवाली को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे नरक चतुर्दशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था।
वहीं, रूप चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर तेल और उबटन से स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे सौंदर्य, तेज और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है। कई क्षेत्रों में इस दिन मां काली की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है, जिसके कारण इसे काली चौदस कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। उसके अत्याचारों से देवता, ऋषि-मुनि और आम लोग परेशान थे। नरकासुर ने अनेक राजाओं की कन्याओं को बंदी बना लिया था और देवताओं के लिए भी संकट उत्पन्न कर दिया था।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर के विरुद्ध युद्ध किया। धार्मिक कथा के अनुसार, युद्ध में सत्यभामा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंततः भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया। इसके बाद उसकी कैद में बंद हजारों महिलाओं को मुक्त कराया गया।
मान्यता है कि नरकासुर पर विजय की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया। तभी से कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।
छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है।
कई परिवारों में स्नान से पहले शरीर पर उबटन लगाया जाता है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण और अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है।
जयपुर में अभ्यंग स्नान का समय: उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, 8 नवंबर को सुबह लगभग 5:41 बजे से 6:41 बजे तक अभ्यंग स्नान का समय बताया गया है। स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को आरोग्य, सकारात्मकता और पुण्य की प्राप्ति होती है।
छोटी दिवाली पर भगवान श्रीकृष्ण, गणेश जी और अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की पूजा-अर्चना करें।
भगवान को फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
शाम को घर के मुख्य द्वार और मंदिर में दीपक जलाएं।
यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करें।
परिवार के सदस्यों के साथ आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।
पूजा सामग्री: मिट्टी के दीपक, रुई की बत्ती, घी या सरसों का तेल, रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, कपूर, अगरबत्ती, गंगाजल और कलावा।
छोटी दिवाली पर दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन दीपक जलाने की कोई एक निश्चित संख्या निर्धारित नहीं है। श्रद्धालु अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपक जला सकते हैं।
घर के मुख्य द्वार, आंगन, पूजा स्थल, तुलसी के पास और घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है। इसके अलावा यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि यम दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
क्या करें:
सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करें।
घर और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें।
भगवान श्रीकृष्ण और अपने आराध्य देव की पूजा करें।
शाम को दीपदान करें।
जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
परिवार के साथ खुशियां बांटें और सकारात्मकता बनाए रखें।
क्या न करें:
दीपक जलाते समय लापरवाही न बरतें।
बच्चों को पटाखों और आग के पास अकेला न छोड़ें।
ज्वलनशील वस्तुओं के पास दीपक न रखें।
किसी के प्रति कटु व्यवहार और विवाद से बचें।
छोटी दिवाली केवल दीप जलाने और उत्सव मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन से बुराइयों को दूर करने, सत्य के मार्ग पर चलने और धर्म की विजय का संदेश भी देता है। भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की कथा हमें सिखाती है कि अत्याचार और अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है।
इस छोटी दिवाली पर अपने घर को दीपों से रोशन करें, परिवार के साथ खुशियां बांटें और जरूरतमंदों की मदद कर त्योहार की खुशियों को और भी खास बनाएं।
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