अलवर का शिशु गृह लावारिस और बेसहारा बच्चों के लिए सहारा बनकर उभरा है, जहां कई विशेष आवश्यकता वाले (स्पेशल नीड्स) बच्चों को देश ही नहीं बल्कि विदेशी परिवार भी अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में एक दृष्टिबाधित मासूम बच्ची को गोद लेने के लिए अमेरिका की एक सिंगल महिला ने आवेदन किया है। फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के तहत एनओसी (NOC) मिलने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की दत्तक ग्रहण प्रक्रिया पूरी होगी।
जानकारी के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद इस बच्ची को लावारिस छोड़ दिया गया था और बाद में उसे गंभीर चोट के कारण एक आंख की रोशनी खोनी पड़ी। एम्स में इलाज के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शुरुआत में किसी भारतीय परिवार ने उसे गोद लेने में रुचि नहीं दिखाई, लेकिन अब अमेरिकी महिला उसके लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नियमों के तहत की जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करता है। इससे पहले भी अलवर से कई विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को इटली और अमेरिका के परिवार गोद ले चुके हैं।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कई लावारिस बच्चियां शिशु गृह में लाई गई हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें गोद देने की कार्रवाई की जाती है। शिशु गृह प्रशासन का कहना है कि विदेशी परिवार स्पेशल नीड्स बच्चों को अपनाने में अधिक आगे आ रहे हैं।
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