अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों, दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता साबित की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने नौ आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला ऐसे मामलों में न्याय व्यवस्था की गंभीरता और कानून के प्रति सख्त रुख को दर्शाता है।
करीब एक दशक तक चले इस मुकदमे के बाद आए फैसले से मृतक के परिजनों ने राहत की सांस ली। वहीं, पूरे अलवर जिले में इस निर्णय की चर्चा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि राजनीतिक रंजिश या व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते किए गए गंभीर अपराधों में कानून देर से सही, लेकिन दोषियों तक जरूर पहुंचता है।
इस ऐतिहासिक फैसले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि न्याय मिलने में समय लग सकता है, लेकिन यदि सबूत मजबूत हों तो अपराधी सजा से बच नहीं सकते। अदालत के इस निर्णय को पीड़ित परिवार के लिए न्याय और समाज के लिए कानून के राज की मिसाल माना जा रहा है।
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