जयपुर के मुहाना क्षेत्र से मंगलवार को लापता हुए चार मासूम बच्चों ने बिना किसी निगरानी के ऐसा लंबा सफर तय किया जिसने रेलवे और बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चे घर से चुपचाप निकलने के बाद पहले गुल्लक तोड़कर उसमें से करीब 700 से 800 रुपए लेकर ई-रिक्शा से जयपुर जंक्शन पहुंचे और वहां से ट्रेन में सवार होकर सुल्तानपुर तक पहुंच गए।
जानकारी के अनुसार, चारों बच्चों ने जयपुर से सुल्तानपुर तक की ट्रेन यात्रा के लिए खुद टिकट खरीदी, लेकिन किसी भी स्टेशन या ट्रेन में उनकी उम्र और अकेले यात्रा को लेकर कोई पूछताछ नहीं की गई। यह पूरी यात्रा लगभग 750 किलोमीटर की बताई जा रही है।
सुल्तानपुर पहुंचने के बाद बच्चे अयोध्या जाने वाली रोडवेज बस में सवार हो गए। बस परिचालक को बच्चों के अकेले होने पर शक हुआ, जिसके बाद पूछताछ की गई और मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद जयपुर और उत्तर प्रदेश पुलिस के समन्वय से बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज के अनुसार, बच्चों के रिश्तेदार अयोध्या और कुशीनगर में रहते हैं, इसलिए जांच के बाद उन्हें उनके नानी पक्ष के परिवार को सौंप दिया गया। बाद में जयपुर पुलिस बच्चों के पिता के साथ उन्हें वापस लेकर रवाना हो गई।
इस घटना में शामिल बच्चों में 13 वर्षीय अंशिका साहनी, 9 वर्षीय आराध्या, 11 वर्षीय सलोनी और 8 वर्षीय सचिन शामिल हैं, जिनमें से दो सगी बहनें और दो सगे भाई-बहन हैं। चारों आपस में चचेरे भाई-बहन बताए गए हैं।
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