फीफा वर्ल्ड कप के उत्साह के बीच राजस्थान के डूंगरपुर जिले में फुटबॉल का जुनून ग्रामीण अंचलों से लेकर शहर तक गहराई से देखने को मिलता है। यहां के खिलाड़ियों ने क्रिकेट के वर्चस्व के बावजूद फुटबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सीमित संसाधनों के बावजूद यह खेल गांव-गांव में युवाओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है।
वर्ष 1980 से 2000 के बीच जब संसाधनों और भामाशाहों की कमी के कारण बड़े राज्य स्तरीय आयोजन प्रभावित हुए, तब फुटबॉल ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैल गया। ओबरी, डूंका, बेडसा, बांसिया, गंधवापाल, रास्तापाल, बोखलापाल, घुघरा और डोजा जैसे गांवों में मजबूत टीमें तैयार हुईं, जिन्होंने उदयपुर, बांसवाड़ा, जयपुर, अजमेर और जोधपुर जैसे जिलों में जाकर कई प्रतियोगिताएं जीतीं।
फुटबॉल की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसका कम खर्चीला होना भी रहा है, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए यह खेल अधिक सुलभ और आकर्षक बन गया।
डूंगरपुर में फुटबॉल को राजपरिवार का भी प्रोत्साहन मिला, और वर्ष 2009 में आयोजित एक विशेष प्रतियोगिता में इंग्लैंड की फुटबॉल टीम का आगमन ऐतिहासिक क्षण रहा।
इस खेल की शुरुआत में शार्दुल चौबीसा और अन्य खेल प्रेमियों के प्रयासों से 1976 में राज्य स्तरीय उपाध्याय मेमोरियल फुटबॉल लीग की नींव रखी गई थी। उस समय खिलाड़ियों की कमी को पूरा करने के लिए गांवों से युवाओं को साइकिलों पर लाकर टीम बनाई जाती थी, जिसने लगातार चार वर्षों तक राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया।
आज डूंगरपुर की यही फुटबॉल परंपरा युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा दे रही है।
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