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नवरात्रि पर चिमापुरा में आस्था का सैलाब: हजारों श्रद्धालुओं की भव्य कलश यात्रा, गांव में गूंजे जयकारे

राजस्थान: के दौसा जिले के बसवा क्षेत्र स्थित चिमापुरा गांव में नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार को काली माता मंदिर से निकली विशाल कलश यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। गांव की गलियों से गुजरती इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।

सुबह से ही गांव में उत्सव जैसा वातावरण था। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी अपने सिर पर कलश रखकर कतारबद्ध तरीके से चल रही थीं। उनके साथ पुरुष और युवा भी जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। “जय माता दी” और “काली माता की जय” के उद्घोष से पूरा गांव गूंज उठा।

कलश यात्रा काली माता मंदिर से शुरू होकर गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई निकली। श्रद्धालुओं ने पूरे गांव की परिक्रमा की, जिसे धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान कई स्थानों पर ग्रामीणों ने यात्रा का स्वागत किया और पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।

यात्रा के दौरान डीजे की धुन पर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई युवा पारंपरिक नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे, वहीं महिलाएं भजन-कीर्तन गाते हुए वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना रही थीं। हाथों में भगवा झंडे लिए श्रद्धालु पूरे जोश के साथ यात्रा में शामिल रहे।

गांव के निवासी महेश राजपूत ने बताया कि यह कलश यात्रा हर साल नवरात्रि के अवसर पर आयोजित की जाती है और यह गांव की परंपरा का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि गांव के लोगों में आपसी भाईचारा और एकता भी बढ़ती है।

यात्रा का समापन काली माता मंदिर में हुआ, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश झुकाकर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

इस अवसर पर गांव में अगले सात दिनों तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। मंदिर परिसर में रोजाना भजन-कीर्तन, जागरण, कथा और हवन जैसे कार्यक्रम होंगे। इन आयोजनों में आसपास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

नवरात्रि के दौरान इस तरह के आयोजन ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक पेश करते हैं। यह न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करते हैं। चिमापुरा गांव की यह कलश यात्रा भी इसी परंपरा का एक सशक्त उदाहरण है।

गांव में सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों ने भी विशेष इंतजाम किए थे। यात्रा के दौरान यातायात को नियंत्रित किया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया।

कुल मिलाकर, चिमापुरा गांव में आयोजित यह कलश यात्रा नवरात्रि के उत्सव को और अधिक भव्य और यादगार बना गई। श्रद्धालुओं की आस्था, उत्साह और भक्ति ने इस आयोजन को एक विशेष पहचान दी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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