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मां ने मजदूरी कर खरीदी किताबें, बेटे ने रच दी सफलता की कहानी: 97.60% लाकर बना प्रेरणा

राजस्थान: के दौसा जिले के महवा उपखंड के पावटा गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को रोक नहीं सकतीं। आर्थिक तंगी और अभावों के बीच पले-बढ़े रिहान खान ने 12वीं विज्ञान वर्ग की परीक्षा में 97.60 प्रतिशत अंक हासिल कर एक बड़ी सफलता हासिल की है।

रिहान की यह उपलब्धि सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत और परिवार के त्याग की एक जीवंत मिसाल बन गई है। खास बात यह है कि रिहान ने गणित विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं, जो उनकी लगन और प्रतिभा को दर्शाता है।

रिहान का परिवार बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर है। उनका घर कच्चा और टूटी-फूटी छत वाला है, जहां रहने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। बरसात, गर्मी और सर्दी—हर मौसम में परिवार ने इन्हीं कठिन हालातों का सामना किया है। इसके बावजूद रिहान ने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया।

रिहान के पिता ईशाक मोहम्मद एक छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का खर्च उठाते हैं, जबकि उनकी मां मंजू बानो मजदूरी कर घर चलाने में सहयोग करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर रही कि कई बार रिहान को स्कूल की फीस भरने और किताबें खरीदने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

रिहान की मां मंजू बानो ने भावुक होकर बताया कि जब उनका बेटा किताबों की मांग करता था, तो उन्हें बहुत दुख होता था क्योंकि वे तुरंत उसे पूरा नहीं कर पाती थीं। बावजूद इसके उन्होंने मजदूरी करके पैसे जुटाए और अपने बेटे की पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास किया। यही संघर्ष और मां का त्याग रिहान की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना।

रिहान खुद बताते हैं कि उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच रहकर भी लगातार पढ़ाई की और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। उनका सपना भविष्य में एक शिक्षक बनने का है, ताकि वे भी समाज में शिक्षा का प्रसार कर सकें और अन्य बच्चों को प्रेरित कर सकें।

रिहान की इस उपलब्धि के बाद उनके घर में खुशी का माहौल है। आसपास के लोग भी उनकी सफलता से प्रेरित हो रहे हैं और उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। उनकी मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में नहीं आ सकती।

हालांकि, रिहान के सामने अब आगे की पढ़ाई का खर्च एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। लेकिन उनकी मां ने दृढ़ संकल्प के साथ कहा है कि वे मजदूरी करके भी अपने बेटे की पढ़ाई जारी रखेंगी। इसी बीच संजीव पब्लिक स्कूल, पावटा के प्रबंधन ने रिहान की आधी फीस माफ करने का फैसला किया है, जिससे परिवार को कुछ राहत मिली है।

यह कहानी न सिर्फ एक छात्र की सफलता की है, बल्कि यह एक मां के संघर्ष, त्याग और विश्वास की भी कहानी है। रिहान खान आज उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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