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“खेजड़ी कटाई पर भड़का संत समाज! 15 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना—औद्योगिक प्रोजेक्ट के खिलाफ बड़ा आंदोलन”

राजस्थान: की राजधानी Jaipur के पास स्थित सांभर-नरेना मार्ग पर इन दिनों एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भैराणा धाम क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के खिलाफ संत समाज, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। इस विरोध को लेकर अब 15 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि टांका गौशाला के पास स्थित पवित्र Bhairana Dham की भूमि पर उद्योग स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस फैसले के खिलाफ लोगों में गहरा आक्रोश है।

हजारों संत-साधुओं के जुटने की तैयारी

इस आंदोलन की जानकारी साधु-संतों ने जयपुर स्थित प्रेस क्लब में साझा की। उनका कहना है कि 15 अप्रैल को सुबह 10 बजे से धरना शुरू किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में संत-साधु और आम लोग शामिल होंगे।

संत समाज का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक इस भूमि का आवंटन रद्द नहीं किया जाता।

खेजड़ी के पेड़ों की कटाई बना बड़ा मुद्दा

विरोध का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई है। खासकर Khejdi Tree (खेजड़ी) के पेड़ों को काटे जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है।

यह पेड़ न केवल पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का भी अहम हिस्सा माना जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले 6 महीनों में हजारों पेड़-पौधों को नष्ट किया गया है।

RIICO पर गंभीर आरोप

संत राम रत्नदास स्वामी के अनुसार, Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation (RIICO) द्वारा करीब 800 बीघा भूमि औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित की गई है।

उनका आरोप है कि बिना पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखे और स्थानीय भावनाओं की अनदेखी करते हुए यह परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है।

पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर खतरा

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस क्षेत्र में विविध प्रकार के जीव-जंतु और पक्षी रहते हैं। पेड़ों की कटाई से उनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाएगा, जिससे पूरे इलाके की पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि खेजड़ी जैसे पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

धार्मिक भावनाएं भी आहत

संत प्रकाश दास महाराज ने कहा कि भैराणा धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां उद्योग स्थापित करना धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि यह भूमि “धार्मिक नगरी” की पहचान रखती है और यहां औद्योगिक गतिविधियां शुरू करना लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।

पहले भी हुआ था विरोध

इस मुद्दे पर 5 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद कुछ समय के लिए काम रोक दिया गया था। हालांकि, अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

क्या होगा आगे?

आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह विरोध और बड़ा रूप ले सकता है। प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि इसमें पर्यावरण और धार्मिक दोनों मुद्दे जुड़े हुए हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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