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19 साल के युवक के पेट से निकली 5 किलो की तिल्ली, जयपुर में ढाई घंटे की सर्जरी से डॉक्टरों ने बचाई जान

राजस्थान: की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 19 वर्षीय युवक की जान बचाई। इस ऑपरेशन में युवक के पेट से करीब 5 किलोग्राम वजन की तिल्ली (स्प्लीन) निकाली गई, जो सामान्य से कई गुना अधिक थी।

डॉक्टरों के अनुसार, आमतौर पर किसी व्यक्ति की तिल्ली का वजन 150 से 200 ग्राम के बीच होता है, लेकिन इस मरीज के मामले में यह असामान्य रूप से बढ़कर 5 किलो तक पहुंच गई थी। यह केस न केवल अस्पताल बल्कि चिकित्सा जगत के लिए भी एक दुर्लभ उदाहरण बन गया है।

गौशर बीमारी बना वजह

यह युवक झालावाड़ जिले का रहने वाला है और वह एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी गौशर बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में शरीर के विभिन्न अंगों—जैसे लिवर, बोनमैरो और तिल्ली—में वसायुक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे अंगों का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी के चलते मरीज की तिल्ली लगातार बढ़ती गई, जिससे शरीर में खून बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने लगी। नतीजतन, युवक का हीमोग्लोबिन काफी कम हो गया और प्लेटलेट्स भी तेजी से गिरने लगे।

कई शहरों में इलाज के बाद जयपुर पहुंचा

मरीज ने पहले कोटा और उदयपुर सहित कई शहरों में इलाज करवाया, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वह जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल के हेमेटोलॉजी विभाग में पहुंचा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उसकी जांच की और कुछ समय तक दवाइयों से इलाज किया।

हालांकि, स्थिति में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने सर्जरी के जरिए तिल्ली निकालने का फैसला लिया। यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि मरीज की हालत पहले से ही गंभीर थी।

ऑपरेशन में सामने आई बड़ी चुनौती

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व सीनियर सर्जन डॉ. आर.जी. खंडेलवाल ने किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती मरीज में खून और प्लेटलेट्स की कमी थी।

मरीज का हीमोग्लोबिन मात्र 6 था, जबकि प्लेटलेट्स की संख्या केवल 15,000 थी, जो सामान्य से बहुत कम है। ऐसे में ओपन सर्जरी करना बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि इसमें अत्यधिक ब्लड लॉस का खतरा बना रहता है।

ढाई घंटे चली सर्जरी, टीमवर्क से मिली सफलता

डॉक्टरों की टीम ने 16 अप्रैल को ऑपरेशन किया, जो करीब ढाई घंटे तक चला। इस दौरान डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक तिल्ली को शरीर से अलग किया और ब्लड लॉस को नियंत्रित रखने के लिए विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया।

इस सर्जरी में डॉ. सुनील चौहान, डॉ. मनोज सोनी, डॉ. लक्षिता राठौड़, डॉ. रानू श्रीवास्तव और डॉ. आशीष सामेजा सहित नर्सिंग स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों की निगरानी के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

आगे होगा विशेष इलाज (ERT)

डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज को आगे एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (ERT) दी जाएगी, जिससे उसके शरीर में एंजाइम की कमी को पूरा किया जा सकेगा। यह थेरेपी गौशर बीमारी के इलाज में बेहद कारगर मानी जाती है।

क्या है गौशर बीमारी?

गौशर बीमारी एक दुर्लभ आनुवांशिक विकार है, जिसमें शरीर में ग्लूकोसेरेब्रोसाइड नामक पदार्थ जमा हो जाता है। इससे लिवर और तिल्ली का आकार बढ़ जाता है, हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और खून की कमी (एनीमिया) जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।


निष्कर्ष:

जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में की गई यह सर्जरी न केवल एक मेडिकल उपलब्धि है, बल्कि यह दिखाती है कि सही समय पर विशेषज्ञ इलाज और डॉक्टरों की कुशलता से गंभीर से गंभीर बीमारियों का भी सफल इलाज संभव है। इस मामले ने दुर्लभ बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी काम किया है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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