स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव के निर्देशन और मॉनिटरिंग में चल रहे इन प्रयासों के तहत शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने और नवाचारी शिक्षण पद्धतियां अपनाने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए अक्टूबर माह में 'स्टार टीचर' पहल शुरू की गई है। इसके तहत 26 अक्टूबर को जारी पहली सूची में प्रदेश के आठ सरकारी विद्यालयों के 15 शिक्षकों को राजस्थान के पहले स्टार टीचर के रूप में चयनित किया गया।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इनमें 11 शिक्षकों का चयन मार्च 2026 के कॉम्पिटेंसी बेस्ड असेसमेंट (CBA) के परिणामों के आधार पर किया गया है। वहीं, चार शिक्षकों को कक्षा में कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाने, शैक्षणिक खेलों और शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के रचनात्मक उपयोग के लिए चुना गया है।
चयनित शिक्षकों को शिक्षक ऐप पर डिजिटल प्रमाण पत्र दिए गए हैं। उनकी सूची शाला दर्पण पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है। विभाग अब हर महीने उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन कर उन्हें सम्मानित करेगा।
शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से 'राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान' दो चरणों में संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा एक शिक्षक को एक बच्चे की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। संबंधित शिक्षक बच्चे के परिवार से संपर्क कर उसका विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं।
अभियान की निगरानी शाला दर्पण पोर्टल और डैशबोर्ड के माध्यम से की जा रही है। इसके अलावा ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी (CBEO) स्तर पर हर 15 दिन में समीक्षा और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (CDEO) द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। जिला कलेक्टर भी हर महीने अभियान की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं।
इस अभियान में बालिकाओं, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, प्रवासी परिवारों, बाल श्रमिकों, आदिवासी और घुमंतू समुदाय के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 तक प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कुल 72,98,854 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज किया गया। यह वर्ष 2025-26 के 72,50,496 विद्यार्थियों के नामांकन से 48,358 अधिक है।
कुल नामांकन में 53.3 प्रतिशत बालिकाएं और 46.7 प्रतिशत बालक शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष सरकारी स्कूलों में बालिकाओं का नामांकन बालकों से लगभग 4.86 लाख अधिक रहा। वर्तमान में प्रत्येक 1,000 बालकों पर 1,143 बालिकाएं नामांकित हैं।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में सरकारी विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
बांसवाड़ा: 11,939 विद्यार्थियों की वृद्धि
उदयपुर: 9,448 विद्यार्थियों की वृद्धि
बाड़मेर: 5,937 विद्यार्थियों की वृद्धि
जालोर: 5,485 विद्यार्थियों की वृद्धि
सिरोही: 4,295 विद्यार्थियों की वृद्धि
वहीं, जिन जिलों में नामांकन में कमी दर्ज की गई है, वहां ड्रॉपआउट रोकने और विद्यार्थियों को स्कूलों से जोड़ने के लिए विशेष समीक्षा की जा रही है।
राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान और स्टार टीचर पहल के माध्यम से शिक्षा विभाग का फोकस एक ओर स्कूलों से दूर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने पर है, तो दूसरी ओर बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने पर है। विभाग के अनुसार, इन प्रयासों से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने और शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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