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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 का रास्ता साफ, याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका

जयपुर, 14 अगस्त। कॉलेज शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 को लेकर चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ में धर्मवीर मीणा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने विस्तृत जवाब पेश किया। आयोग की ओर से याचिकाकर्ता द्वारा कथित रूप से गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जाने पर शास्ति लगाने की मांग भी की गई। इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने याचिका वापस ले ली।

922 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ

आयोग के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का मूल विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को 574 पदों के लिए जारी किया गया था। इससे पहले कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के जरिए सेवा नियमों में संशोधन करते हुए अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 से बढ़ाकर 100 कर दी गई थी।

आयोग ने न्यायालय को बताया कि इसी नियम के तहत 574 पदों के मूल विज्ञापन में 348 पदों की वृद्धि करते हुए कुल 922 पद किए गए। इसके लिए 13 मई 2026 को शुद्धि पत्र जारी किया गया था। आयोग ने इस पद वृद्धि को पूरी तरह नियमों के अनुरूप बताया।

भर्ती और साक्षात्कार प्रक्रिया नहीं हुई बाधित

आयोग ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से 30 जुलाई 2026 को पारित अंतरिम आदेश के बावजूद भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया गया। आयोग द्वारा साक्षात्कार के लिए सफल अभ्यर्थियों के परिणाम लगातार जारी किए जाते रहे और भर्ती एवं साक्षात्कार प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।

आयोग ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष

मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026, धर्मवीर मीणा एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य से जुड़ा था। 30 जुलाई को पारित अंतरिम आदेश के बाद आयोग ने आदेश को निरस्त करवाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत स्टे वेकेशन एप्लीकेशन और जवाबदावा प्रस्तुत किया।

आयोग ने अपने जवाब में कहा कि याचिका और स्टे एप्लीकेशन में बताए गए तथ्य भ्रामक हैं। आयोग की ओर से न्यायालय से यह भी अनुरोध किया गया कि गलत तथ्यों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने और न्यायालय का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ करने के लिए याचिकाकर्ता पर शास्ति लगाई जाए।

आयोग के अनुसार न्यायालय में तथ्यों और नियमों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद याचिकाकर्ता के पास आगे मुकदमा चलाने का वैधानिक आधार नहीं बचा और उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली।

बड़ी भर्तियों में पहले से कैविएट दायर करेगा आयोग

भर्ती प्रक्रियाओं को भविष्य में अनावश्यक कानूनी अड़चनों से बचाने के लिए आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देश पर अब एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली सभी बड़ी भर्तियों में न्यायालय में पहले से कैविएट दायर करने का निर्णय लिया गया है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर एकतरफा आदेश के कारण बड़ी भर्ती प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित न हो।

करीब 3000 न्यायिक मामलों की निगरानी

आयोग के अनुसार वर्तमान में करीब 3000 न्यायिक प्रकरण विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। इनके प्रभावी और समयबद्ध निस्तारण के लिए आयोग अध्यक्ष प्रत्येक मामले को लीगल टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से देखते और चर्चा करते हैं, ताकि न्यायालय में मजबूत पैरवी सुनिश्चित की जा सके।

आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह को भारतीय सेना के अंतर्गत 51 सब एरिया, गुवाहाटी की विधि शाखा में कार्य करने का अनुभव रहा है। आयोग के अनुसार उनके विधिक एवं रणनीतिक अनुभव का लाभ आयोग की न्यायिक पैरवी और भर्ती प्रक्रियाओं को निर्बाध रखने की दिशा में मिल रहा है।

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