लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के एमएलसी लाल बिहारी यादव का एक बयान विवादों में आ गया है। शिक्षक सम्मेलन के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोला है। बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।
बताया जा रहा है कि एक शिक्षक बैठक के दौरान लाल बिहारी यादव पार्टी समर्थकों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चुनाव में पार्टी के प्रति समर्थन को लेकर एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव किसी कुत्ते के गले में घंटी बांधकर भी चुनाव मैदान में भेज दें, तो समर्थकों को उसी उम्मीदवार को वोट देना चाहिए।
एमएलसी के बयान का मकसद पार्टी और संगठन के प्रति कार्यकर्ताओं की एकजुटता पर जोर देना बताया जा रहा है। हालांकि, बयान में इस्तेमाल किए गए उदाहरण को लेकर अब राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सपा लगातार संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग वर्गों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बयान भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।
लाल बिहारी यादव का बयान भी इसी चुनावी माहौल में सामने आया है। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
बीजेपी ने इस बयान को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाता को अपने विवेक के आधार पर उम्मीदवार चुनने का अधिकार है। उनके मुताबिक, किसी पार्टी के नेता या उम्मीदवार के कहने मात्र से वोट देने की अपील लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान से मतदाताओं की स्वतंत्र पसंद और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गलत संदेश जाता है। पार्टी ने सपा नेतृत्व से इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के नेताओं के बयान अब राजनीतिक हथियार बनते जा रहे हैं। ऐसे में लाल बिहारी यादव की टिप्पणी को बीजेपी आने वाले दिनों में सपा के खिलाफ चुनावी मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है।
फिलहाल, इस बयान को लेकर सियासी घमासान जारी है और नजरें इस बात पर हैं कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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