देश: में बढ़ती ईंधन चुनौतियों और ऊर्जा संरक्षण को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में ईंधन की खपत कम करने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसलों की घोषणा की है। इन फैसलों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम, सरकारी बैठकों का ऑनलाइन आयोजन, मंत्रियों की यात्राओं पर रोक और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना शामिल है।
सरकार के मुताबिक यह विशेष अभियान 15 मई से अगले 90 दिनों तक लागू रहेगा। इस दौरान सरकारी विभागों और निजी संस्थानों को भी ऊर्जा बचत और ईंधन नियंत्रण के निर्देश दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि दिल्ली में सरकारी दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाएगा। इसके साथ ही निजी कंपनियों से भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाने की अपील की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, ट्रैफिक घटेगा और ईंधन की बचत होगी। हालांकि आवश्यक सेवाओं को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है ताकि जरूरी कामकाज प्रभावित न हो।
ऊर्जा बचत के लिए दिल्ली सरकार ने सरकारी बैठकों के तरीके में भी बदलाव किया है। अब 50 प्रतिशत मीटिंग ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे अनावश्यक यात्रा और कार्यालयों में बिजली की खपत कम होगी।
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल माध्यमों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए।
सरकार के सबसे चर्चित फैसलों में से एक यह है कि अब दिल्ली सरकार के मंत्री और विधायक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री और विधायक मेट्रो और डीटीसी बसों से सफर करेंगे ताकि जनता को भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर सिर्फ 4 कर दी है। इसे प्रतीकात्मक लेकिन बड़ा संदेश माना जा रहा है।

सरकार ने ईंधन बचत के लिए मंत्रियों की विदेशी यात्राओं को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसके अलावा अगले तीन महीनों तक बड़े सरकारी सार्वजनिक कार्यक्रम भी आयोजित नहीं किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि इन कदमों से खर्च और ऊर्जा दोनों की बचत होगी। साथ ही सरकारी संसाधनों का उपयोग जरूरी सेवाओं पर किया जा सकेगा।
ऊर्जा संरक्षण अभियान के तहत सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर के तापमान को 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच स्थायी रूप से सेट किया जाएगा।
बिजली की खपत नियंत्रित करने के लिए संवेदक (सेंसर) भी लगाए जाएंगे, जो जरूरत के अनुसार बिजली उपयोग को नियंत्रित करेंगे। सरकार का दावा है कि इससे बड़ी मात्रा में बिजली बचाई जा सकेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति पूरी तरह तैयार है और जल्द लागू की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
ऊर्जा संरक्षण अभियान के साथ सरकार ने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई है। मॉल और बाजारों में ‘Made in India’ उत्पादों के लिए अलग सेक्शन बनाए जाएंगे।
90 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के तहत स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह अभियान केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में सादगी, संसाधनों के संतुलित उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश भी है।
हालांकि विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार की मंशा और इसके व्यावहारिक असर पर सवाल उठा सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जनता और निजी कंपनियां इन कदमों को कितनी गंभीरता से अपनाती हैं।
दिल्ली सरकार ने तेल संकट और ऊर्जा संरक्षण को लेकर बड़े और सख्त फैसले लिए हैं। वर्क फ्रॉम होम, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, ऑनलाइन मीटिंग और ईंधन नियंत्रण जैसे कदमों के जरिए सरकार राजधानी में ऊर्जा बचत का नया मॉडल पेश करना चाहती है। आने वाले समय में यह अभियान कितना सफल होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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