करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 200 बीघा भूमि पर बनने वाले इस सेंटर में गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट और घोड़े की करीब 30 प्रजातियों के संरक्षण, नस्ल सुधार और संवर्धन पर रिसर्च की जाएगी। राजस्थान की पारंपरिक नस्लों पर विशेष फोकस रहेगा।
सेंटर में पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे और पशुपालकों को उन्नत नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले पशु भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। पशुपालन क्षेत्र में नए स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने की भी योजना है।
परियोजना के संचालन के लिए सरकार ने 15 पदों को मंजूरी दी है, जिनमें 7 स्थायी और 8 संविदा पद शामिल हैं। सेंटर को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सौर ऊर्जा और उन्नत वर्षा जल संचयन प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इसे पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है।
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