डीजीपी ने अधिकारियों को नवीन आपराधिक कानूनों के तहत अपराधियों पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही ई-जीरो एफआईआर, ई-साक्ष्य और ई-सम्मन की व्यवस्था को मजबूत करने तथा लंबित मामलों का निर्धारित समय में निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 की तुलना में जुलाई 2026 तक प्रदेश में कुल अपराधों में 17.25 प्रतिशत और संपत्ति संबंधी अपराधों में 32.32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में पॉक्सो मामलों में 21.56 प्रतिशत, डकैती में 25.49 प्रतिशत, लूट में 20.84 प्रतिशत और बालिग दुष्कर्म के मामलों में 10.67 प्रतिशत की कमी आई है।
डीजीपी ने साइबर थानों की कार्यक्षमता बढ़ाने, साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम और म्यूल बैंक खातों की पहचान करने तथा साइबर हॉटस्पॉट पर कार्रवाई के निर्देश दिए। अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क और साइबर स्लेवरी से जुड़े मामलों में भी समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया।
नशे के खिलाफ कार्रवाई में नार्को सेल को सक्रिय करने, केंद्रीय एजेंसियों से बेहतर समन्वय और वाणिज्यिक मात्रा वाले मामलों में वित्तीय अनुसंधान मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
20 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में 1,248 वांछित एवं संगठित अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा एनडीपीएस के 614, आर्म्स एक्ट के 226 और अवैध खनन के 474 मामले दर्ज किए गए, जबकि 426 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, डमी अभ्यर्थी, फर्जी डिग्री और नकल जैसे मामलों में एसपी को व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश दिए गए। वहीं सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए विशेष सेल गठित करने और Next-Gen e-Challan System लागू करने की तैयारियां समयबद्ध पूरी करने को कहा गया।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, आमजन की सुरक्षा और पुलिसिंग में जवाबदेही राजस्थान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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