उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमित पाठक ने बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई ने न केवल पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आईजी ने खरगूपुर थाना प्रभारी शेषमणि पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई एक गंभीर मामले में समय पर कार्रवाई न करने के चलते की गई है।
जानकारी के मुताबिक, खरगूपुर थाना क्षेत्र में एक युवती के अपहरण का मामला सामने आया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने पीड़िता से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए।
पीड़िता की मां ने 16 मार्च को आईजी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद आईजी ने तत्काल थानाध्यक्ष को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से थाने स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जब मामला गंभीर होता गया, तो आईजी ने स्वयं थाने का निरीक्षण किया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि थानाध्यक्ष ने अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरती है। इसी आधार पर उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
इस कार्रवाई का दायरा यहीं तक सीमित नहीं रहा। कर्नलगंज कोतवाली के कोतवाल के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
मामला 19 फरवरी का है, जब बटौरा बख्तावर गांव निवासी श्रीचंद तिवारी की मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। उन्होंने 21 फरवरी को थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने इस मामले में न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही कोई कार्रवाई की।
पीड़ित ने 18 मार्च को आईजी कार्यालय में शिकायत की, जिसके बाद एक विशेष टीम को जांच के लिए भेजा गया। जांच में पाया गया कि न केवल शिकायत को नजरअंदाज किया गया, बल्कि उसे जन शिकायत रजिस्टर में भी दर्ज नहीं किया गया।
यह गंभीर लापरवाही और अपराध को छिपाने की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कर्नलगंज कोतवाल के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं।
इस पूरे मामले में आईजी ने सीओ नगर और अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) से भी स्पष्टीकरण मांगा है। यह कदम दर्शाता है कि जिम्मेदारी केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही तय की जा रही है।
अमित पाठक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आम जनता को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें कोई भी ढिलाई गंभीर परिणाम ला सकती है।
यह पहली बार नहीं है जब आईजी अमित पाठक ने इस तरह की सख्त कार्रवाई की हो। इससे पहले भी वे कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ लापरवाही के मामलों में कार्रवाई कर चुके हैं। उनकी यह कार्यशैली पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद आम जनता में यह संदेश गया है कि अब शिकायतों को अनदेखा करना आसान नहीं होगा। पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे कदम बेहद जरूरी माने जा रहे हैं।
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