मुख्यमंत्री रविवार को बेंगलुरु में राजस्थान फाउंडेशन के विभिन्न चैप्टर्स के अध्यक्षों के साथ संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज विकास और निवेश की अपार संभावनाओं वाली भूमि के रूप में उभर रहा है। ऐसे में प्रवासी राजस्थानी प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पर्यटन, स्टार्टअप, कृषि, जल संरक्षण और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर प्रदेश को आगे ले जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी राजस्थानियों के निवेश से जुड़े सभी पहलुओं में हरसंभव सहयोग और सुविधा उपलब्ध करवाएगी। निवेश प्रस्तावों पर सिंगल विंडो क्लीयरेंस के माध्यम से प्राथमिकता के साथ आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में निवेशकों के लिए भूमि, सड़क एवं रेल नेटवर्क, लॉजिस्टिक सुविधाएं, ऊर्जा और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को बेहतर कारोबारी वातावरण मिले और निवेश प्रस्ताव जल्द से जल्द धरातल पर उतरें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं बैटरी निर्माण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग एवं मिनरल आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, आईटी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 35 से अधिक नीतियां लागू की गई हैं। वहीं, राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश एमओयू में से करीब 9 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की समृद्ध विरासत और पर्यटन क्षमता को देखते हुए प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दी जा रही है। इसके लिए नई राजस्थान पर्यटन नीति लागू की गई है।
उन्होंने विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र की ऐतिहासिक हवेलियों और भित्ति चित्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राजस्थान की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना शुरू की गई है, जिसके तहत सीकर, झुंझुनूं और चूरू की 662 ऐतिहासिक हवेलियों को चिन्हित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रवासी राजस्थानियों से जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों के सहयोग से 'कर्मभूमि से मातृभूमि' अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत प्रदेश में करीब 45 हजार जल रिचार्ज एवं जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से 20 हजार से अधिक संरचनाओं का निर्माण अब तक पूरा हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी इस अभियान से और अधिक जुड़ें तथा अपनी मातृभूमि के जल संरक्षण और सामाजिक विकास में योगदान दें।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों का राजस्थान से गहरा भावनात्मक और सामाजिक नाता है। वे जहां भी रहें, अपनी मातृभूमि के विकास में योगदान देने की भावना रखते हैं। उन्होंने राजस्थान फाउंडेशन के सभी चैप्टर्स से आह्वान किया कि वे प्रवासी राजस्थानियों और राज्य सरकार के बीच सक्रिय संपर्क एवं सहयोग के मंच के रूप में कार्य करें।
उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों की विशेषज्ञता, अनुभव और वैश्विक संपर्क राजस्थान के विकास के लिए महत्वपूर्ण पूंजी हैं। इनके प्रभावी उपयोग से प्रदेश में निवेश, रोजगार, नवाचार और सामाजिक विकास को नई गति दी जा सकती है।
बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारीगण, राजस्थान फाउंडेशन के विभिन्न चैप्टर्स के अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी उपस्थित रहे।
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