स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर 50 फीट की सीमा का निशान लगाए बिना ही कार्रवाई की जा रही है। वहीं, नोटिस को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें कार्रवाई से पहले नोटिस दिए गए थे, जबकि कुछ प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्हें किसी तरह का नोटिस नहीं मिला।
व्यापारियों का कहना है कि दीपावली और त्योहारी सीजन नजदीक है। ऐसे समय में दुकानों और कारोबार पर कार्रवाई होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकान खाली करने की स्थिति में उनका सामान कहां रखा जाए और कारोबार को कहां स्थानांतरित किया जाए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, 6 अक्टूबर को कोर्ट से मामले में आदेश आने की उम्मीद थी। ऐसे में उससे पहले कार्रवाई शुरू होने को लेकर भी लोगों में असंतोष है। व्यापारियों का कहना है कि यदि कार्रवाई जरूरी थी तो इसे दीपावली के बाद भी किया जा सकता था, जिससे त्योहार के समय उन्हें परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
मामले को लेकर किरण शेखावत ने भी सरकार और बीजेपी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कार्रवाई की जरूरत होने के बावजूद त्योहारी सीजन को देखते हुए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ फैसला लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि दीपावली के बाद कार्रवाई होने से व्यापारियों और आमजन को तत्काल परेशानी से बचाया जा सकता था।
JDA की कार्रवाई के बीच न्यू सांगानेर रोड पर स्थित हनुमान मंदिर भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर आसपास के लोगों की आस्था का केंद्र है। फिलहाल मंदिर परिसर को तोड़ने की कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन सड़क के बीच स्थित मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में मंदिर को लेकर भी कार्रवाई की जाती है तो इसका विरोध किया जा सकता है।
फिलहाल न्यू सांगानेर रोड पर JDA की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों और आमजन में असंतोष का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की सीमा और प्रक्रिया स्पष्ट करने, प्रभावित लोगों को उचित सूचना देने तथा उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
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