बठिंडा–श्रीगंगानगर रेलखंड पर लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इलेक्ट्रिक इंजन से यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है, जिससे इस पूरे क्षेत्र में रेलवे संचालन को नई गति मिली है और यात्रियों में खुशी का माहौल है। रविवार से इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के तहत ट्रेनें दौड़नी शुरू हुईं। जैसे ही अम्बाला से चलकर श्रीगंगानगर जाने वाली ट्रेन अबोहर रेलवे स्टेशन पर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ पहुंची, यात्रियों ने इस बदलाव का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
उत्तर-पश्चिम रेलवे द्वारा पहले ही 10 जून को जारी आदेश में इस रेलखंड पर चार प्रमुख ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजन से चलाने की घोषणा की गई थी, जिसे अब पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इन ट्रेनों में दिल्ली–श्रीगंगानगर इंटरसिटी, श्रीगंगानगर–ऋषिकेश (हरिद्वार), सराय रोहिल्ला–बीकानेर एक्सप्रेस और अम्बाला–श्रीगंगानगर ट्रेन शामिल हैं।
इस बदलाव से अब बठिंडा में इंजन बदलने की जरूरत समाप्त हो गई है, जिससे यात्रियों के यात्रा समय में लगभग एक से डेढ़ घंटे तक की बचत होने की संभावना है। इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी और समयपालन में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
करीब 127 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड का इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य लगभग 116.75 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। बल्लूआना में ट्रैक्शन सब स्टेशन (TSS) का निर्माण भी पूरा हो चुका है, जिससे इस पूरे रूट पर अब निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस इलेक्ट्रिफिकेशन से केवल यात्री ट्रेनों की रफ्तार ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि मालगाड़ियों का संचालन भी अधिक सुचारू और तेज होगा। भविष्य में इस मार्ग पर और अधिक लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
स्थानीय यात्रियों और रेलवे प्रशासन ने इस कदम को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया है। इससे न केवल यात्रा सुविधाजनक और तेज होगी, बल्कि डीजल की खपत कम होने से पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी और रेलवे की परिचालन लागत में भी बचत होगी।
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