झुंझुनूं में पंचायत राज एवं निकाय चुनावों से पहले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण को लेकर नई मांग उठी है। ईडब्ल्यूएस जन जागृति मंच के प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने सर्किट हाउस में आयोजित चर्चा के दौरान कहा कि पंचायत और निकाय चुनावों में भी EWS वर्ग को 10 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से EWS आरक्षण की मौजूदा पात्रता शर्तों में बदलाव कर राजस्थान मॉडल को पूरे देश में लागू करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में लागू किया गया 10 प्रतिशत EWS आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय था, लेकिन वर्तमान पात्रता शर्तों के कारण वास्तविक जरूरतमंद परिवार इसका पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS वर्ग की सीमित भागीदारी भी यह दर्शाती है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
राठौड़ ने 5 एकड़ कृषि भूमि की सीमा को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि आज के समय में बढ़ती खेती लागत और सीमित आय के कारण कई किसान परिवार केवल भूमि स्वामित्व के आधार पर इस श्रेणी से बाहर हो जाते हैं, जबकि वे वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं।
उन्होंने आवास संबंधी पात्रता शर्तों पर भी चिंता जताई और कहा कि मौजूदा प्रावधान संयुक्त परिवार व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। कई युवा केवल पात्रता बनाए रखने के लिए अलग निवास करने को मजबूर हो रहे हैं, जो सामाजिक रूप से उचित नहीं है।
इसके अलावा राज्य और केंद्र की आरक्षण नीतियों में असंगति का मुद्दा भी उठाया गया, जिसके कारण कई समुदायों को EWS आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। मंच प्रतिनिधियों का कहना है कि राजस्थान में लागू व्यवहारिक मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
इस मौके पर उपस्थित अन्य सदस्यों ने भी EWS आरक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और इसे अधिक समावेशी बनाने की मांग की।
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