फादर्स डे केवल शुभकामनाओं का अवसर नहीं, बल्कि उन पिताओं के संघर्ष, त्याग और समर्पण को याद करने का दिन भी है, जिनकी मेहनत बच्चों की सफलता की मजबूत नींव बनती है। राजस्थान के जैसलमेर जिले में ऐसी कई प्रेरक कहानियां सामने आई हैं, जहां पिताओं ने सीमित संसाधनों, आर्थिक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा और सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। आज इन्हीं संघर्षों का परिणाम है कि मरुधरा की संतानों ने प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया गांव निवासी वीरेन्द्र चारण ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा-2024 में प्रदेश में दूसरी रैंक प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस सफलता के पीछे उनके पिता जेठूदान चारण का वर्षों का अनुशासन, मेहनत और समर्पण छिपा है। पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल के रूप में कार्यरत जेठूदान ने अपनी व्यस्त ड्यूटी के बावजूद बेटे की पढ़ाई के लिए हर संभव सहयोग दिया और उसे एक अनुशासित माहौल प्रदान किया। वीरेन्द्र का कहना है कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनके पिता के अनुशासन और प्रेरणा को जाता है।
इसी तरह रामदेवरा की रक्षा शर्मा ने भी कठिन परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। उनके पिता मदन शर्मा एक टैक्सी चालक हैं और उन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी बेटी की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया। एक ही कमरे में रहकर पढ़ाई करने से लेकर कर्ज लेकर शिक्षा पूरी कराने तक, पिता ने हर कठिन समय में बेटी का साथ दिया। आज वे टैक्सी चलाकर कर्ज चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें इस संघर्ष पर गर्व है।
ये दोनों कहानियां इस बात का उदाहरण हैं कि जब पिता अपने बच्चों के सपनों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनतीं।
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