अलवर जिले के भनोखर गांव की 18 वर्षीय NEET छात्रा रेणु मीणा ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली। छात्रा अपने तीन बहनों और एक भाई के साथ फ्लैट में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। वह रोजाना लाइब्रेरी जाकर पढ़ाई करती थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी। 14 जून की शाम सभी भाई-बहन लाइब्रेरी से लौटे, जिसके बाद रेणु अपने कमरे में चली गई। कुछ देर बाद जब जवाब नहीं मिला तो दरवाजा खोला गया, जहां वह रोशनदान में फंदे से लटकी मिली।
परिजनों के अनुसार, रेणु पढ़ाई में बेहद मेधावी थी और 10वीं व 12वीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर चुकी थी। बताया जा रहा है कि नीट परीक्षा निरस्त होने के बाद वह मानसिक तनाव में थी और आगामी री-नीट परीक्षा से पहले उसने यह कदम उठा लिया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और शोक है।
इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भरतपुर सांसद संजना जाटव ने परिजनों से मिलकर घटना को दुखद बताया, जबकि नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया।
इसी तरह सीकर में भी NEET की तैयारी कर रहे दो छात्रों की आत्महत्या के मामले पहले सामने आ चुके हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।
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