जयपुर। उपभोक्ता न्याय व्यवस्था को लेकर जारी कंज्यूमर जस्टिस रैंकिंग-2026 में राजस्थान ने देश के बड़े और मध्यम राज्यों की श्रेणी में तीसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य की मजबूत संस्थागत व्यवस्था और उपभोक्ता आयोगों के बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 तक राज्य उपभोक्ता आयोग में अध्यक्ष का पद लगातार भरा रहा और उपभोक्ता आयोगों के लिए बजट आवंटन भी देश के सर्वाधिक राज्यों में शामिल रहा। साथ ही राज्य में सर्किट बेंचों के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया।
हालांकि रिपोर्ट ने कई गंभीर कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। राज्य आयोग में सदस्यों के स्वीकृत पदों में रिक्तियां बढ़ी हैं और वर्ष 2025 तक कर्मचारियों के करीब 36 प्रतिशत पद खाली पाए गए। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की केस निस्तारण दर 80 प्रतिशत से कम रही, जबकि बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे में एक वर्ष से अधिक समय लगा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मध्यस्थता (मेडिएशन) के लिए बहुत कम मामलों को भेजा गया और महिला कर्मचारियों की भागीदारी भी अपेक्षाकृत कम रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाए और वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को बढ़ावा मिले, तो राजस्थान उपभोक्ता न्याय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है
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