जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि राजस्थानी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। जयपुर में आयोजित 'राजस्थान गौरव सम्मान समारोह' में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने अपना भाषण राजस्थानी भाषा में शुरू किया और महाकवि कन्हैयालाल सेठिया की प्रसिद्ध रचना 'धरती धोरा री' तथा सूर्यमल्ल मिश्रण की अमर पंक्तियों का उल्लेख करते हुए संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
राज्यपाल ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठी भाषा केंद्र खोलने के प्रस्ताव के बाद उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा केंद्र खोलने के निर्देश जारी किए, ताकि अपनी भाषा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पहल पहले ही हो जानी चाहिए थी।
श्री बागडे ने कहा कि भारत विश्वगुरु तभी बन सकता है, जब हमारी संस्कृति, नैतिक मूल्य और परंपराएं सुरक्षित रहें। उन्होंने पेपर लीक जैसी घटनाओं को नैतिक मूल्यों में गिरावट का परिणाम बताते हुए समाज से संस्कृति और नैतिकता को मजबूत करने का आह्वान किया। समारोह में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को 'राजस्थान गौरव सम्मान' से सम्मानित किया और भारतीय संस्कृति के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
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