जयपुर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बजरी खनन पर रोक लगाने के लिए राजस्थान सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों के अनुरूप कई अहम फैसले लिए गए।
सरकार ने संबंधित जिलों के जिला कलेक्टरों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि पुलिस अधीक्षकों को अवैध खनन नेटवर्क, परिवहनकर्ताओं और वित्तीय मददगारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
खनन पर प्रभावी निगरानी के लिए एआई आधारित ऑनलाइन डैशबोर्ड, ड्रोन सर्वे, हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी, सीसीटीवी, पीटीजेड कैमरे और एआई-सक्षम थर्मल कैमरों का उपयोग किया जाएगा। नदी के स्वरूप में होने वाले बदलाव और नए खनन स्थलों की हर महीने मैपिंग होगी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हर 15 दिन में संयुक्त टीमों द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया जाएगा। इन अभियानों में बॉडी कैमरा और जीपीएस उपकरणों का उपयोग अनिवार्य रहेगा ताकि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी हो।
सरकार स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित करेगी। इसके लिए अभयारण्य क्षेत्र में क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली विकसित की जाएगी, जिसके माध्यम से ग्रामीण, मछुआरे और आम नागरिक गोपनीय रूप से फोटो और वीडियो के साथ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। उपयोगी सूचना देने वालों को पुरस्कार भी दिया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन रोकने में अधिकारियों के प्रदर्शन को उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (APAR) से जोड़ा जाएगा। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, इको-टूरिज्म और स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि चंबल अभयारण्य की जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
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