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3 दिन से धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस: माघ मेला प्रशासन बोला– 24 घंटे में साबित करें कि आप शंकराचार्य हैं

प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में बीते तीन दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। मेला प्राधिकरण ने उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बता रहे हैं।

सोमवार देर रात करीब 12 बजे माघ मेला के कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। शिष्यों ने यह कहते हुए नोटिस लेने से इनकार कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार पदाधिकारी मौजूद नहीं है। इसके बाद मंगलवार सुबह प्रशासन की ओर से शिविर के मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर दिया गया।

यह नोटिस माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। नोटिस में ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे सुप्रीम कोर्ट के विवाद का हवाला दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। शीर्ष अदालत ने 14 अक्टूबर 2022 को स्पष्ट आदेश दिया था कि जब तक इस मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति को शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता और न ही किसी का पट्टाभिषेक किया जा सकता है।

प्रशासन का कहना है कि इसके बावजूद माघ मेला 2025–26 के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में लगे बोर्ड पर स्वयं को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” लिखा है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है। इसी कारण उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार

इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि शंकराचार्य वही होता है जिसे अन्य शंकराचार्य स्वीकार करें। उन्होंने दावा किया कि चार में से दो पीठ उन्हें शंकराचार्य मानती हैं और तीसरी पीठ मौन है, जो उनकी स्वीकृति के समान है।

उन्होंने कहा कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री या यहां तक कि भारत के राष्ट्रपति भी यह तय नहीं कर सकते कि कौन शंकराचार्य होगा। शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य परंपरा के अनुसार ही होता है।

धरना और टकराव की पृष्ठभूमि

यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन और गहरा गया, जब अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए।

करीब दो घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस ने पालकी को संगम से करीब एक किलोमीटर दूर ले जाकर रोक दिया। तब से अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन से माफी और ससम्मान स्नान की मांग पर अड़े हुए हैं।

समर्थन और विरोध

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य को कई साधु-संतों और धार्मिक संगठनों का समर्थन मिला है। किन्नर अखाड़े की जगतगुरु हिमांगी सखी ने घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से माफी की मांग की है। वहीं, शंकराचार्य के शिष्यों का कहना है कि पूर्व में सरकारी व्यवस्था ने उन्हें शंकराचार्य के रूप में स्वीकार करते हुए स्नान कराया है।


निष्कर्ष:

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा यह मामला अब धार्मिक परंपरा, प्रशासनिक अधिकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर प्रशासन न्यायालय के आदेश का पालन कराने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को निर्विवाद शंकराचार्य बताते हुए पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले घंटों में उनके जवाब के बाद यह विवाद और गहराने या सुलझने की दिशा तय करेगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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