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जयपुर बना इंटरनेशनल आर्ट हब! 26 विदेशी कलाकारों का जमावड़ा, 100 से ज्यादा कलाकृतियां होंगी तैयार

राजस्थान: की राजधानी जयपुर एक बार फिर कला और संस्कृति के रंग में रंग गई है। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ डिजाइन एंड आर्ट्स द्वारा आयोजित 7 दिवसीय इंटरनेशनल आर्ट कैम्प ‘सर्जना 2026’ का भव्य आगाज सोमवार से हो गया। इस खास आयोजन में देश-विदेश के 26 इंटरनेशनल कलाकार हिस्सा ले रहे हैं, जो मिलकर 100 से अधिक कलाकृतियां तैयार करेंगे।

यह आर्ट कैम्प केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कला के वैश्विक संवाद का मंच बन गया है। साउथ कोरिया, चीन और श्रीलंका सहित कई देशों से आए कलाकार यहां भारतीय कलाकारों और छात्रों के साथ अपनी कला साझा कर रहे हैं। इस आयोजन में देशभर की 12 यूनिवर्सिटी के छात्र कलाकार भी शामिल हुए हैं, जिससे यह मंच और भी विविधतापूर्ण बन गया है।

पदमश्री तिलक गिताई का बड़ा संदेश

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदमश्री कलाकार तिलक गिताई रहे। उन्होंने भारतीय पारंपरिक कला शैलियों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली में इन शैलियों को शामिल करना बेहद जरूरी है। गिताई ने कहा कि भारतीय कला केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे भारतीय कला की जड़ें गहरी हैं और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उनके अनुसार, अगर छात्र पारंपरिक और आधुनिक कला का संतुलन सीखें, तो वे वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

देश-विदेश के कलाकारों का संगम

इस आर्ट कैम्प में भारत के कई प्रतिष्ठित कलाकार भी मौजूद हैं, जिनमें प्रेमजीत बारिया, आबिद सूरती, अंजनी रेड्डी और प्रकाश बाल जोशी शामिल हैं। इन कलाकारों के साथ काम करने का अवसर छात्रों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

साउथ कोरिया से आए कलाकार ऑचुल ह्वांग ने कला और संगीत के अनोखे संबंध को समझाया। उन्होंने कहा कि एक चित्रकार की रचना ‘मौन संगीत’ की तरह होती है, जो बिना आवाज के भी भावनाओं को व्यक्त करती है।

छात्रों के लिए सीखने का बड़ा अवसर

पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर राहुल सिंघी ने कहा कि इस तरह के आयोजन छात्रों को उन कलाकारों के साथ काम करने का मौका देते हैं, जिनसे वे केवल किताबों या सोशल मीडिया के जरिए परिचित होते हैं। यह मंच छात्रों को न केवल नई तकनीक सीखने का अवसर देता है, बल्कि उन्हें अपना नेटवर्क मजबूत करने में भी मदद करता है।

वाइस चांसलर डॉ. सुरेश चंद्र पाधी ने भी भारतीय कला परंपराओं पर जोर देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को पश्चिमी कला के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन कला आज भी प्रासंगिक है और इससे प्रेरणा लेना जरूरी है।

वर्कशॉप और एग्जीबिशन की खासियत

इस 7 दिवसीय आर्ट कैम्प में विभिन्न प्रकार की वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं। इनमें टेराकॉटा, वॉश पेंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, आरी-तारी और कैलीग्राफी जैसी पारंपरिक और आधुनिक कला विधाएं शामिल हैं। इन वर्कशॉप्स के जरिए छात्र नई तकनीकों को सीख सकेंगे और अपने कौशल को निखार सकेंगे।

कार्यक्रम के तहत 4 और 5 अप्रैल को जवाहर कला केंद्र में एक भव्य आर्ट एग्जीबिशन भी आयोजित की जाएगी, जहां इन सभी कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी।

मीडिया फेस्टिवल भी होगा आकर्षण का केंद्र

आर्ट कैम्प ‘सर्जना 2026’ के साथ ही जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन विभाग द्वारा 3 दिवसीय मीडिया फेस्टिवल भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें फिल्म फेस्टिवल, रील मेकिंग, आरजे हंट, फोटोग्राफी, एड-मैड और कंटेंट राइटिंग जैसे कई प्रतियोगिताएं होंगी, जिसमें देशभर की यूनिवर्सिटी की टीमें हिस्सा लेंगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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