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जयपुर में बड़ी कार्रवाई: 19 साल का टैक्स बकाया, Ramada और Marriott होटल सील; 2 घंटे में ही मच गया हड़कंप!

राजस्थान: की राजधानी जयपुर में सोमवार को नगर निगम की सख्ती ने शहर के बड़े होटल ग्रुप्स को झटका दे दिया। करोड़ों रुपये के यूडी (Urban Development) टैक्स बकाया के चलते Hotel Ramada और Jaipur Marriott Hotel पर कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियों को सील कर दिया गया। हालांकि, कार्रवाई के महज 2 घंटे के भीतर ही होटल प्रबंधन ने पूरा बकाया जमा कर दिया, जिसके बाद सील हटा दी गई।

सुबह हुई कार्रवाई, दोपहर तक बदल गया हाल

नगर निगम की रेवेन्यू टीम ने मालवीय नगर जोन में अभियान चलाते हुए सबसे पहले जवाहर सर्किल के पास स्थित मैरियट होटल ग्रुप को निशाने पर लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस ग्रुप पर करीब 5.97 करोड़ रुपये का यूडी टैक्स बकाया था। लंबे समय से नोटिस देने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर टीम ने सख्त कदम उठाते हुए होटल परिसर के बाहर बने लग्जरी कार शोरूम और एक रेस्टोरेंट को सील कर दिया।

इसी क्रम में राजापार्क स्थित होटल रमाडा पर भी कार्रवाई की गई। इस होटल ग्रुप पर लगभग 1.36 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया था। टीम ने यहां भी होटल से जुड़ी कुछ संपत्तियों को सील कर दिया।

19 साल से लंबित था टैक्स

नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि दोनों ही मामलों में टैक्स का बकाया वर्ष 2007 से चला आ रहा था। बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद होटल प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अंततः प्रशासन को मजबूर होकर यह कार्रवाई करनी पड़ी।

मैरियट होटल के मामले में, बाहरी कमर्शियल यूनिट्स जैसे शोरूम और रेस्टोरेंट पर टैक्स बकाया था। वहीं, रमाडा होटल के मामले में टैक्स दर को लेकर विवाद बना हुआ था। होटल प्रबंधन इसे औद्योगिक दर से चुकाना चाहता था, जबकि नगर निगम ने इसे कमर्शियल कैटेगरी में रखकर टैक्स की मांग की थी।

2 घंटे में जमा हुआ करोड़ों का टैक्स

कार्रवाई के तुरंत बाद होटल प्रबंधन हरकत में आया। मालवीय नगर जोन के उपायुक्त मुकुट सिंह के अनुसार, दोनों होटल ग्रुप्स के प्रतिनिधि नगर निगम कार्यालय पहुंचे और करीब 2 घंटे के भीतर पूरा बकाया टैक्स चेक के माध्यम से जमा कर दिया।

इसके बाद निगम ने तुरंत सील की गई संपत्तियों को खोलने के निर्देश जारी किए और कार्रवाई समाप्त की।

यूडी टैक्स क्या होता है?

यूडी टैक्स यानी अर्बन डेवलपमेंट टैक्स, शहरी क्षेत्रों में स्थित संपत्तियों पर लगाया जाने वाला वार्षिक कर है। यह टैक्स नगर निगमों के लिए आय का प्रमुख स्रोत होता है। इसके जरिए शहर में सड़क, सीवरेज, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास और रखरखाव के लिए फंड जुटाया जाता है।

आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए इसकी दरें अलग-अलग होती हैं। होटल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, शोरूम और अन्य संस्थानों पर यह टैक्स कमर्शियल दरों के अनुसार लिया जाता है।

सख्ती का संदेश

इस कार्रवाई को नगर निगम की बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में कई अन्य बड़े बकायेदार भी हैं, जिन पर जल्द ही इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि बड़े कॉरपोरेट और होटल समय पर टैक्स नहीं चुकाते, तो इससे नगर निगम की वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है और विकास कार्यों में बाधा आती है।

आगे क्या?

नगर निगम अब ऐसे मामलों की समीक्षा कर रहा है जहां लंबे समय से टैक्स बकाया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।


निष्कर्ष:

जयपुर नगर निगम की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब टैक्स बकाया रखने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होगी। 19 साल पुराने बकाया को सिर्फ 2 घंटे में वसूल करना प्रशासन की सक्रियता और दबाव का बड़ा उदाहरण है। यह कदम शहर में वित्तीय अनुशासन लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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