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“मुझे खामोश किया, हराया नहीं…” राघव चड्ढा का बड़ा बयान—AAP में बढ़ा सियासी घमासान

आम आदमी पार्टी (AAP): के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के एक दिन बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने साफ कहा—“मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं।”

वीडियो में चड्ढा ने बिना किसी का नाम लिए अपनी ही पार्टी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वे संसद में हमेशा आम जनता के मुद्दे उठाते रहे हैं और यह समझ से परे है कि उनके बोलने पर रोक क्यों लगाई जा रही है। उन्होंने पूछा कि क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है?

चड्ढा ने कहा कि उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगे खाने, गिग वर्कर्स की समस्याओं, बैंक चार्जेस, टेलीकॉम कंपनियों की नीतियों और मिडिल क्लास पर बढ़ते टैक्स जैसे मुद्दे संसद में उठाए। उनका कहना था कि इन मुद्दों से आम आदमी को फायदा हुआ, तो इससे पार्टी को नुकसान कैसे हो सकता है।

उन्होंने अपने संदेश के अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा—“मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”

हालांकि चड्ढा ने अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया, लेकिन उनके बयान से पार्टी के अंदर मतभेदों की अटकलें तेज हो गई हैं।

उधर, AAP नेतृत्व ने चड्ढा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि चड्ढा संसद में पार्टी के मुख्य मुद्दों की बजाय छोटे-छोटे मुद्दे उठा रहे थे। उन्होंने कहा—“अगर कोई मोदी से डर जाए, तो वो देश के लिए कैसे लड़ेगा?”

दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पिछले कुछ समय में न तो केंद्र सरकार से सवाल किए और न ही पार्टी के अहम मुद्दों पर आवाज उठाई।

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस मामले पर संतुलित बयान देते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे फैसले पहले भी होते रहे हैं और अगर कोई पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है, तो कार्रवाई की जाती है।

AAP ने गुरुवार को चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह Ashok Mittal को नियुक्त किया था। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि चड्ढा को अब पार्टी की ओर से बोलने का समय न दिया जाए।

इस फैसले के पीछे की वजह आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी अनुशासन और रणनीतिक मतभेदों का परिणाम हो सकता है।

गौरतलब है कि राघव चड्ढा 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने थे और उनका कार्यकाल 2028 तक है। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनकी पार्टी गतिविधियों में सक्रियता कम नजर आई थी। यहां तक कि पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal के मुश्किल दौर में भी उनकी चुप्पी चर्चा का विषय बनी रही।

इस पूरे घटनाक्रम ने AAP के अंदरूनी समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव है या पार्टी के भीतर गहराता मतभेद—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।


निष्कर्ष:

राघव चड्ढा का बयान और AAP नेताओं की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। यह विवाद आने वाले समय में AAP की राजनीति और नेतृत्व संरचना पर बड़ा असर डाल सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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