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बिहार में CM को लेकर सस्पेंस गहराया! किसके सिर सजेगा ताज, मंत्रिमंडल गणित में क्या चल रहा खेल?

बिहार: की राजनीति इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहां सत्ता का समीकरण तो लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा अब भी रहस्य बना हुआ है। नई सरकार के गठन को लेकर दिल्ली और पटना के बीच लगातार मंथन जारी है। सवाल सबसे बड़ा यही है कि आखिर बिहार की कमान किसके हाथों में जाएगी?

सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। माना जा रहा है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होगा। हालांकि, अब तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बड़ी भूमिका में नजर आ सकती है। विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद का दावा मजबूत माना जा रहा है। वहीं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) भी सत्ता में अपनी हिस्सेदारी को लेकर सक्रिय है और कई अहम विभागों की मांग कर रहा है।

मंत्रिमंडल के संभावित गणित पर नजर डालें तो कुल मंत्रियों की संख्या 30 से अधिक हो सकती है। इसमें भाजपा के पास सबसे ज्यादा मंत्री पद रहने की संभावना है, जबकि जदयू भी लगभग बराबरी की हिस्सेदारी चाह रहा है। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हम और रालोमो जैसी सहयोगी पार्टियों को भी सीमित लेकिन महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

डिप्टी सीएम पद को लेकर भी चर्चा तेज है। वर्तमान में भाजपा के पास दो डिप्टी सीएम हैं, लेकिन नई सरकार में जदयू भी इस पद पर दावा ठोक सकता है। जदयू के अंदर निशांत कुमार और विजय चौधरी जैसे नामों की चर्चा जोरों पर है। दोनों नेताओं को पार्टी में मजबूत पकड़ और नेतृत्व का अनुभव है।

वहीं भाजपा खेमे में भी कई नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में हैं। सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, प्रेम कुमार और संजीव चौरसिया जैसे नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, क्योंकि वे सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी भाजपा के लिए फायदेमंद माने जा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा की रणनीति अक्सर चौंकाने वाली रही है। ऐसे में यह भी संभव है कि आखिरी समय में कोई नया चेहरा सामने आ जाए। यही वजह है कि पार्टी के नेता फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर भी खींचतान बनी हुई है। जदयू इस पद को अपने पास रखना चाहता है, जबकि भाजपा इसे छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही। फिलहाल संकेत हैं कि मौजूदा अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा कर सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हर दिन नए मंत्रिमंडल की लिस्ट वायरल हो रही है, लेकिन इनमें से किसी की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सरकार गठन का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करने वाला फैसला भी है। भाजपा जहां अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं जदयू भी अपने अस्तित्व और प्रभाव को बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है।

अब सबकी नजर दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर टिकी है। जैसे ही अंतिम निर्णय होगा, बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


निष्कर्ष:

बिहार में नई सरकार का गठन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संतुलन है। मुख्यमंत्री का चेहरा और मंत्रिमंडल का गणित आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। फिलहाल सस्पेंस बरकरार है, लेकिन जल्द ही तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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