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16 साल से फरार पाकिस्तानी आतंकी गिरफ्तार: लश्कर मॉड्यूल का बड़ा खुलासा, 5 आरोपी पकड़े गए

जम्मू-कश्मीर: के श्रीनगर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 16 साल से फरार पाकिस्तानी आतंकी को गिरफ्तार कर लिया है। यह ऑपरेशन न केवल लंबे समय से सक्रिय आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ने में सफल रहा, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि भी माना जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के संयुक्त ऑपरेशन में कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो पाकिस्तानी आतंकी और तीन स्थानीय मददगार शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए आतंकियों में एक की पहचान अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरेरा के रूप में हुई है, जो पिछले 16 वर्षों से फरार था। दूसरा आतंकी उस्मान उर्फ खुबैब बताया जा रहा है।

लंबे समय से सक्रिय था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, ये दोनों आतंकी करीब 2010 में भारत में घुसपैठ कर आए थे और तब से कश्मीर घाटी में सक्रिय थे। इस दौरान उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करते हुए कई आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया और नए आतंकियों की भर्ती में भी भूमिका निभाई।

सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरेरा ने बीते वर्षों में लगभग 40 आतंकियों को कमांड किया था। हालांकि इनमें से अधिकांश को भारतीय सुरक्षा बलों ने अलग-अलग ऑपरेशनों में मार गिराया।

19 जगहों पर चला सर्च ऑपरेशन

इस पूरे ऑपरेशन के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा राजस्थान और हरियाणा सहित कुल 19 स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान कई अहम दस्तावेज और संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है, जिससे नेटवर्क के अन्य कनेक्शन का भी पता चल सकता है।

स्थानीय मददगार भी गिरफ्तार

पुलिस ने तीन स्थानीय लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जो आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे थे। इनमें मोहम्मद नकीब भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा शामिल हैं। ये लोग आतंकियों को पनाह देने, खाना उपलब्ध कराने और उनकी आवाजाही में मदद करते थे।

अधिकारियों के अनुसार, ये मददगार बॉर्डर पार बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे और उनके निर्देशों पर काम कर रहे थे। यह नेटवर्क वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता के जरिए आतंकियों को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखने में मदद कर रहा था।

फर्जी दस्तावेजों से बाहर भागने की कोशिश

जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क का एक अन्य सदस्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश से बाहर भागने में सफल रहा। इसके लिए लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता

इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। 16 साल से फरार आतंकी की गिरफ्तारी से यह साबित होता है कि एजेंसियां लगातार ऐसे तत्वों पर नजर बनाए हुए हैं और समय आने पर उन्हें पकड़ने में सक्षम हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा और आने वाले समय में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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