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‘कंप्रोमाइज्ड चाचा’ पर सियासी संग्राम! संबित पात्रा के नेहरू पर तीखे वार, AI समिट को लेकर कांग्रेस पर बड़ा आरोप

देश: की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का तूफान उठ खड़ा हुआ है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को ‘कंप्रोमाइज्ड चाचा’ बताया। उनके इस बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में पात्रा ने आरोप लगाया कि नेहरू के शासनकाल में विदेशी एजेंसियों का प्रभाव था और कई फैसले बाहरी दबाव में लिए गए। उन्होंने कहा कि “आज जो लोग समझौते की बात करते हैं, उन्हें इतिहास में झांककर देखना चाहिए कि असली समझौते किस दौर में हुए।”


नेहरू युग पर उठाए सवाल

पात्रा ने नेहरू के निजी सचिव एम.ओ. माथाई का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में उनके अमेरिकी एजेंट होने की चर्चाएं होती थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 1960 के दशक में सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी के एजेंट प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच रखते थे।

भाजपा नेता ने कई ऐतिहासिक मुद्दों को उठाते हुए सवाल किया:

  • अक्साई चीन में चीनी गतिविधियों की चेतावनी को संसद में अफवाह क्यों बताया गया?

  • कच्छ के रण में जमीन गंवाने के पीछे क्या कारण थे?

  • तिब्बत को चीन का हिस्सा स्वीकार करने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया?

  • कश्मीर में जनमत संग्रह की बात बिना सहमति क्यों की गई?

  • बंगाल के बेरूबारी क्षेत्र का हिस्सा पाकिस्तान को क्यों दिया गया?

पात्रा ने कहा कि इन सवालों के जवाब देश जानना चाहता है और कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उस समय किन दबावों में फैसले लिए गए।


ग्वादर पोर्ट का मुद्दा भी उठाया

संबित पात्रा ने 1958 में ओमान के सुल्तान द्वारा ग्वादर पोर्ट भारत को देने की कथित पेशकश का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जबकि आज वही ग्वादर पोर्ट चीन और पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।


AI समिट को लेकर कांग्रेस पर आरोप

भाजपा सांसद ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि हाल ही में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देने की पेशकश की। पात्रा के अनुसार, कुछ वायरल स्क्रीनशॉट्स में दावा किया गया है कि समिट के खिलाफ पोस्ट या रील बनाने के लिए 25 हजार से 1.5 लाख रुपये तक के ऑफर दिए गए।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन भाजपा ने इसे “संगठित अभियान” बताया है।


कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेहरू आज प्रधानमंत्री नहीं हैं और सवाल मौजूदा सरकार से पूछे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “जो भी मौजूदा प्रधानमंत्री से सवाल करता है, उसे जेल भेज दिया जाता है।” खेड़ा ने कहा कि युवाओं, किसानों और विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।


यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन

20 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट 2026 के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। कार्यकर्ता मंच पर चढ़ गए और टी-शर्ट लहराईं, जिन पर प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति की तस्वीर के साथ “PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड” लिखा था। इस दौरान कार्यक्रम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।

इस घटना के बाद से भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।


सियासी तापमान बढ़ा

संबित पात्रा के बयान ने नेहरू की विरासत को लेकर फिर बहस छेड़ दी है। भाजपा जहां इसे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित सवाल बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे ध्यान भटकाने की रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक मंचों पर और गरमा सकता है।

नेहरू पर ‘कंप्रोमाइज्ड चाचा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक बयानबाजी को और तीखा बना सकता है। AI समिट से जुड़े आरोपों और पलटवारों के बीच यह स्पष्ट है कि 2026 की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। इतिहास, वर्तमान और डिजिटल राजनीति—तीनों के मेल ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है। अब देखना होगा कि यह बहस तथ्यात्मक विमर्श में बदलती है या सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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