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जयपुर में मेडिकल चमत्कार! छोटा चीरा लगाकर बच्चेदानी से निकाली 15 साल पुरानी विशाल गांठ

राजस्थान: की राजधानी जयपुर के Sawai Man Singh Hospital यानी SMS हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। अस्पताल के सर्जरी विभाग ने एक महिला की बच्चेदानी से 15 साल पुरानी विशाल गांठ को छोटे से चीरे के जरिए निकालकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

डॉक्टरों का कहना है कि इतनी बड़ी गांठ का इस तरह छोटे चीरे से ऑपरेशन हॉस्पिटल में पहली बार हुआ है। इस सफलता के बाद अस्पताल की मेडिकल टीम की हर तरफ सराहना हो रही है।

15 साल से दर्द झेल रही थी महिला

सर्जरी विभाग की एचओडी डॉ. ऋचा जैन के अनुसार, मरीज मनोज कुम्हेर की रहने वाली हैं और पिछले करीब 15 वर्षों से पेट में गांठ की समस्या से परेशान थीं।

गांठ का आकार लगातार बढ़ता जा रहा था, जिसकी वजह से उन्हें:

  • लगातार पेट दर्द
  • चलने-फिरने में परेशानी
  • पेट में भारीपन
  • दैनिक काम करने में दिक्कत

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि बच्चेदानी में मौजूद गांठ का आकार बेहद बड़ा हो चुका था।

छोटा चीरा लगाकर निकाली विशाल गांठ

इस जटिल ऑपरेशन को डॉक्टर नरेन्द्र शर्मा और उनकी टीम ने अंजाम दिया। सबसे खास बात यह रही कि इतनी बड़ी गांठ को निकालने के लिए सामान्यत: पेट को पूरी तरह खोलना पड़ता है, लेकिन डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सिर्फ छोटे चीरे से ही सर्जरी कर दी।

डॉ. नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि:

“महिला की बच्चेदानी से निकली गांठ का आकार 24x19x17 सेंटीमीटर था। इतनी बड़ी गांठ को निकालने के लिए आमतौर पर बड़ा चीरा लगाया जाता है, लेकिन हमारी टीम ने डिलीवरी के दौरान लगाए जाने वाले छोटे चीरे के बराबर कट लगाकर ऑपरेशन किया।”

यह तकनीक मरीज के लिए कम दर्दनाक और जल्दी रिकवरी वाली मानी जाती है।

डॉक्टरों की टीम ने मिलकर किया ऑपरेशन

इस सफल सर्जरी में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की अहम भूमिका रही। ऑपरेशन टीम में:

  • डॉ. महेंद्र चौधरी
  • डॉ. सोनाली

शामिल रहे।

वहीं एनेस्थीसिया विभाग से:

  • डॉ. सुशील भाटी
  • डॉ. कंचन चौहान
  • डॉ. सुनील चौहान
  • डॉ. मनोज सोनी
  • डॉ. नम्रता कौशिक

ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पूरी टीम ने कई घंटों तक चले ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।

मेडिकल क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी बड़ी गांठ को छोटे चीरे से निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें सर्जन की कुशलता और आधुनिक तकनीक दोनों की बड़ी भूमिका होती है।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सर्जरी से:

  • मरीज को कम दर्द होता है
  • खून कम बहता है
  • संक्रमण का खतरा कम होता है
  • रिकवरी तेजी से होती है

यही वजह है कि अब मिनिमली इनवेसिव तकनीकों को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।

मरीज की हालत अब स्थिर

डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन के बाद महिला की हालत स्थिर है और वह तेजी से रिकवर कर रही हैं। परिवार ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया है।

मरीज के परिजनों ने कहा कि लंबे समय से दर्द झेल रही महिला को अब बड़ी राहत मिली है।

SMS हॉस्पिटल की बढ़ी प्रतिष्ठा

जयपुर का SMS हॉस्पिटल पहले से ही राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है। यहां हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सरकारी अस्पतालों में भी आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की मदद से जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा सकती हैं।

महिलाओं को डॉक्टरों की सलाह

डॉक्टरों ने महिलाओं को सलाह दी है कि पेट दर्द, अनियमित ब्लीडिंग या पेट में सूजन जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें।

समय पर जांच और इलाज से बड़ी बीमारियों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

निष्कर्ष

SMS हॉस्पिटल जयपुर में हुई यह सर्जरी मेडिकल क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 15 साल पुरानी और बेहद बड़ी गांठ को छोटे चीरे से निकालना डॉक्टरों की कुशलता और आधुनिक तकनीक का शानदार उदाहरण है। इस सफल ऑपरेशन ने मरीज को नई जिंदगी देने के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत किया है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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