Download App Now Register Now

‘मूर्ति छूना अपमान कैसे?’ सुप्रीम कोर्ट का तीखा सवाल, सबरीमाला विवाद पर क्या आने वाला है बड़ा फैसला?

देश: के सबसे चर्चित धार्मिक और संवैधानिक विवादों में से एक, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई एक बार फिर तेज हो गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाकर बहस को नया मोड़ दे दिया है—“मूर्ति को छूना ईश्वर का अपमान कैसे हो सकता है?”

यह सवाल न केवल धार्मिक परंपराओं बल्कि संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकारों पर भी सीधा असर डालता है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें धार्मिक आस्था, परंपरा और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन तलाशने की कोशिश की जा रही है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या संविधान उस व्यक्ति की रक्षा नहीं करेगा जिसे केवल उसके जन्म या लिंग के आधार पर मंदिर में प्रवेश या देवता को छूने से रोका जाता है। कोर्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह इस मामले को केवल धार्मिक परंपरा के नजरिए से नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में भी देख रहा है।

मंदिर पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील एडवोकेट वी. गिरी ने कोर्ट में दलील दी कि हर मंदिर की अपनी धार्मिक परंपराएं होती हैं और वे उस धर्म का अभिन्न हिस्सा होती हैं। उन्होंने कहा कि सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा को ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ माना जाता है, इसलिए वहां की पूजा पद्धति और नियम उसी के अनुरूप बनाए गए हैं। उनके अनुसार, इन परंपराओं में किसी तरह का हस्तक्षेप धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा।

यह मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है। वर्ष 1991 में केरल हाईकोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की आयु वाली महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी, यह कहते हुए कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को हटा दिया और महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी। इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब सुनवाई हो रही है।

मौजूदा सुनवाई में केवल सबरीमाला ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़े करीब 66 अन्य मामलों को भी जोड़ा गया है। इससे यह मामला और भी व्यापक और महत्वपूर्ण बन गया है, क्योंकि इसका प्रभाव देशभर के कई धार्मिक स्थलों और परंपराओं पर पड़ सकता है।

केंद्र सरकार ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि देश में कई ऐसे मंदिर हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। सरकार के अनुसार, न्यायालय को धार्मिक मामलों में सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए।

हालांकि, महिला अधिकार संगठनों और कई याचिकाकर्ताओं का मानना है कि यह प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव का स्पष्ट उदाहरण है और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। उनका तर्क है कि किसी भी धार्मिक परंपरा को मौलिक अधिकारों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या धार्मिक परंपराएं संविधान से ऊपर हो सकती हैं, या फिर उन्हें भी संवैधानिक दायरे में रहकर ही लागू किया जाना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जल्द ही अपना फैसला सुना सकता है। माना जा रहा है कि यह फैसला न केवल सबरीमाला मंदिर, बल्कि पूरे देश में धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।


निष्कर्ष:

सबरीमाला विवाद केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अब धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन का बड़ा सवाल बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला तय करेगा कि परंपरा और समानता में किसे प्राथमिकता मिलेगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
अर्नब चक्रवात का असर: राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, उत्तराखंड में बर्फबारी; ओडिशा में बाढ़-भूस्खलन से 3 की मौत | खाटूश्याम बाबा के दर्शन साढ़े 19 घंटे रहेंगे बंद, दीपावली पर मंदिर में होगी साफ-सफाई; जानें नया शेड्यूल | राजस्थान पंचायत चुनाव परिणाम: नीमकाथाना की 39 ग्राम पंचायतों में सरपंचों के नतीजे घोषित, सिरोही में सबसे बड़ी जीत | सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बोले- 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य | सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर जयपुर में ‘रन फॉर यूनिटी’, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिलाई एकता की शपथ | चक्रवात अर्नब की ताजा अपडेट: कमजोर पड़ा चक्रवात अर्नब, राजस्थान से बिहार तक मौसम का अलर्ट; अंडमान सागर में नया सिस्टम सक्रिय | चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 6 राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ाई, जानिए नई तारीखें | RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस की जीत से BJP को झटका, पुणे में भी हारी; जानिए कहां बिगड़ा चुनावी गणित | भूटान में ग्लेशियर झील फटी, गासा का मशहूर गर्म पानी का कुंड बहा; भारत में बाढ़ का खतरा, बंगाल में 10 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए | मोदी नहीं, 'ओदी' कहिए... ज्ञानेश कुमार का नाम भी बदला, CJP नेता आशुतोष रांका ने समर्थकों को सिखाई कोड लैंग्वेज |