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जोधपुर की 4 ट्रेनें बनेंगी ‘मोबाइल बिलबोर्ड’: मरुधर से रणथंभोर एक्सप्रेस तक दिखेंगे विज्ञापन, रेलवे को होगी 60 लाख की एक्स्ट्रा कमाई

जोधपुर: भारतीय रेलवे अब अपनी आय को केवल यात्री टिकट तक सीमित नहीं रखेगा। राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने नॉन-फेयर रेवेन्यू (NFR) नीति के तहत एक नई और प्रभावशाली योजना लागू की है। इसके तहत जोधपुर मंडल से संचालित चार प्रमुख जोड़ी ट्रेनों को ‘मोबाइल बिलबोर्ड’ के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

इन ट्रेनों के कोचों पर विनाइल रैपिंग के माध्यम से बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन लगाए जाएंगे। रेलवे का लक्ष्य इस योजना से सालाना करीब 60 लाख रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित करना है।


क्यों चुनी गईं ये 4 ट्रेनें? (रूट का कॉमर्शियल गणित)

सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार, जिन ट्रेनों को चुना गया है, वे लंबी दूरी तय करती हैं और देश के प्रमुख धार्मिक, पर्यटन, शिक्षा और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ती हैं। इसी वजह से ये विज्ञापनदाताओं के लिए बेहद आकर्षक हैं।

1. मरुधर एक्सप्रेस (जोधपुर–वाराणसी)

यह ट्रेन जोधपुर से जयपुर, आगरा और वाराणसी जैसे प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों को जोड़ती है। इस रूट पर चलने वाली ट्रेन से विज्ञापन को विविध और बड़े पैमाने पर दर्शक मिलते हैं।

2. रणथंभोर एक्सप्रेस (जोधपुर–इंदौर)

यह ट्रेन सवाई माधोपुर (रणथंभोर नेशनल पार्क) और कोटा (शिक्षा नगरी) से होकर गुजरती है। वाइल्डलाइफ टूरिस्ट और स्टूडेंट्स की भारी आवाजाही इसे ब्रांड प्रमोशन के लिए हॉट प्रॉपर्टी बनाती है।

3. बाड़मेर–ऋषिकेश एक्सप्रेस

राजस्थान के रेगिस्तान को उत्तराखंड के पहाड़ों से जोड़ने वाली यह ट्रेन तीन राज्यों—राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड—से गुजरती है। यह रूट इंटर-स्टेट ब्रांडिंग के लिए खास माना जा रहा है।

4. जोधपुर–दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस

शेखावाटी क्षेत्र होते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जाने वाली यह ट्रेन कॉर्पोरेट और प्रीमियम ब्रांड्स के लिए उपयुक्त मानी जा रही है।


रणथंभोर एक्सप्रेस का टेंडर जारी, बाकी कतार में

सीनियर डीसीएम हितेश यादव ने बताया कि
रणथंभोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12466/12464) के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और टेंडर जारी हो चुका है।
वहीं, मरुधर एक्सप्रेस, बाड़मेर–ऋषिकेश और जोधपुर–दिल्ली सराय रोहिल्ला ट्रेनों के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है।


यात्री सुविधाओं पर खर्च होगी अतिरिक्त कमाई

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, विनाइल रैपिंग से न केवल कोचों की दिखावट बेहतर होगी, बल्कि पेंट और मेंटेनेंस पर आने वाला खर्च भी कम होगा।
इस योजना से होने वाली पूरी नॉन-फेयर रेवेन्यू आय को स्टेशन विकास, यात्री सुविधाओं के उन्नयन और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार में लगाया जाएगा।


निष्कर्ष:

जोधपुर मंडल की यह पहल रेलवे के लिए राजस्व बढ़ाने का नया और स्मार्ट मॉडल साबित हो सकती है। चलती ट्रेनों को मोबाइल बिलबोर्ड बनाकर जहां रेलवे अतिरिक्त कमाई करेगा, वहीं यात्रियों को बेहतर सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य मंडलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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