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राम मंदिर में आज रचा जाएगा इतिहास! राष्ट्रपति करेंगी ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, 7000 मेहमान बनेंगे गवाह

हिंदू नववर्ष: और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आज अयोध्या एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रही है। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा श्रीराम यंत्र की स्थापना की जाएगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे आधुनिक भारत के आध्यात्मिक इतिहास में एक नई कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है।

नववर्ष के साथ नया अध्याय

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी हिंदू नववर्ष के पहले दिन होने जा रहा यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसी दिन से सृष्टि का आरंभ हुआ था, और अब इसी शुभ घड़ी में राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगी।

इस ऐतिहासिक समारोह में करीब 7 हजार विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे, जिनमें संत, धर्माचार्य, कारसेवक, श्रमिक और विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोग शामिल हैं। यह आयोजन देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बसे रामभक्तों के लिए आस्था और गौरव का क्षण है।

राष्ट्रपति का भव्य स्वागत और कार्यक्रम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन सुबह लगभग 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर होगा। इसके बाद वे सड़क मार्ग से मंदिर परिसर पहुंचेंगी। उनका अयोध्या प्रवास करीब चार घंटे का रहेगा।

मंदिर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति सबसे पहले रामलला के दरबार में दर्शन करेंगी। इसके बाद वे मंदिर के दूसरे तल पर जाकर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना करेंगी।

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहेंगी। साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और महासचिव चंपत राय भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

क्या है श्रीराम यंत्र का महत्व?

श्रीराम यंत्र को वैदिक परंपरा में अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है। यह यंत्र भगवान श्रीराम की दिव्य ऊर्जा और संरक्षण का प्रतीक है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यंत्र की स्थापना से मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और शक्ति प्राप्त होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर के द्वितीय तल पर इसकी स्थापना वास्तु और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्थान ऊर्जा के केंद्र के रूप में कार्य करता है।

सामाजिक समरसता का संदेश

श्रीराम यंत्र स्थापना के बाद राष्ट्रपति मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार का पूजन करेंगी और आरती में शामिल होंगी। इसके बाद वे सप्तमंडपम में स्थापित महर्षि वाल्मीकि, माता शबरी और निषादराज के मंदिरों में दर्शन करेंगी।

इस कार्यक्रम को सामाजिक समरसता और समानता के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। यह दर्शाता है कि राम कथा केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने वाली परंपरा है।

श्रमिकों से संवाद की संभावना

इस आयोजन का एक भावनात्मक पहलू यह भी है कि राष्ट्रपति मंदिर निर्माण में लगे श्रमिकों से संवाद कर सकती हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने वर्षों की मेहनत से इस भव्य मंदिर को आकार दिया है।

करीब 400 श्रमिक और 1800 कर्मी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके अलावा राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक और 300 से अधिक संत-धर्माचार्य भी मौजूद रहेंगे।

भव्य तैयारियां: अयोध्या बनी दिव्य नगरी

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर अयोध्या में व्यापक तैयारियां की गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।

नगर निगम द्वारा सड़कों की सफाई, घाटों की धुलाई और प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है। सरयू घाटों और प्रमुख स्थलों पर विशेष लाइटिंग की गई है, जिससे पूरा शहर भव्य और आकर्षक दिखाई दे रहा है।

करीब 500 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जो राष्ट्रपति के दौरे तक लगातार व्यवस्था बनाए रखेंगे।

अभिजीत मुहूर्त में होगी स्थापना

श्रीराम यंत्र की स्थापना अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:55 बजे की जाएगी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह अनुष्ठान संपन्न होगा।

इस मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना जाता है और मान्यता है कि इस समय किए गए कार्य सफलता और समृद्धि प्रदान करते हैं।

देश-विदेश में लाइव प्रसारण

इस ऐतिहासिक आयोजन का लाइव प्रसारण किया जाएगा, जिससे देश-विदेश में बैठे करोड़ों श्रद्धालु इस दिव्य क्षण का साक्षी बन सकेंगे।

डिजिटल माध्यमों के जरिए यह आयोजन वैश्विक स्तर पर प्रसारित होगा, जिससे भारत की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचेगा।

आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है।

राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्यक्रम देश की आस्था, एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि यह नवसंवत्सर की शुरुआत है, जिसे नए संकल्प, नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जाता है।


निष्कर्ष:

अयोध्या में श्रीराम यंत्र की स्थापना का यह ऐतिहासिक आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भारत की आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक बनकर उभरेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में होने वाला यह समारोह आने वाले वर्षों तक एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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