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“राजस्थान कांग्रेस देश से बेहतर!” राज्यवर्धन राठौड़ का तंज, दो-बच्चे नियम पर विपक्ष को भी घेरा

राजस्थान: की सियासत में गुरुवार को उस समय नया मोड़ आ गया जब कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि “राजस्थान कांग्रेस की लीडरशिप देश की कांग्रेस लीडरशिप से बेहतर है। ऐसे में यहां के नेताओं को देश में कांग्रेस को संभालना चाहिए।”

वे जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम परिसर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निकाय और पंचायती राज चुनाव में दो बच्चों की बाध्यता हटाने के फैसले पर भी विपक्ष को घेरा।

दो बच्चों की बाध्यता हटाने पर सफाई

राज्य सरकार ने हाल ही में निकाय और पंचायती राज चुनावों में दो से अधिक बच्चों की शर्त को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

राठौड़ ने कहा कि यह कानून करीब 30 साल पहले परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था। उस समय सामाजिक परिस्थितियां अलग थीं और जागरूकता की आवश्यकता थी।

उन्होंने कहा, “तीन दशक बाद समाज में पर्याप्त जागरूकता आ चुकी है। देश के अन्य राज्यों में ऐसा कोई कानून नहीं है, तो फिर केवल राजस्थान में ही यह पाबंदी क्यों रहे? इसी सोच के साथ सरकार ने इस नीति की पेनल्टी को हटाया है।”

विपक्ष पर तीखा प्रहार

मंत्री ने विपक्षी नेताओं पर “गलत बयानबाजी” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि सरकार ज्यादा बच्चों को बढ़ावा देना चाहती है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है।

राठौड़ ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “अगर हमारी मंशा जनसंख्या बढ़ाने की होती, तो हम तीन बच्चों वाले माता-पिता को ही चुनाव लड़ने की अनुमति देते। तब तो अगले चुनाव तक बच्चे ही बच्चे हो जाते।”

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष मुद्दों के अभाव में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। “उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे अनावश्यक बयान दे रहे हैं,” राठौड़ ने कहा।

कांग्रेस नेतृत्व पर तंज

सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने कहा कि राजस्थान कांग्रेस की लीडरशिप राष्ट्रीय नेतृत्व से बेहतर है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि यहां के नेताओं को देश में कांग्रेस की कमान संभालनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावी रणनीति के तहत दिया गया है, ताकि विपक्ष की अंदरूनी खींचतान को उजागर किया जा सके।

खेल आयोजन पर भी बोले

इस मौके पर राठौड़ ने राजस्थान में खेल आयोजनों को लेकर भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जिस तरह राज्य सरकार ने खेल सुविधाओं को बढ़ावा दिया है, उससे उम्मीद है कि अन्य खेलों की तरह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मुकाबले भी राजस्थान में आयोजित होने की संभावना है।

उन्होंने खिलाड़ियों को पुरस्कार भी वितरित किए और कहा कि राज्य में खेल संस्कृति को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।

राजनीतिक मायने

दो बच्चों की बाध्यता हटाने का फैसला ग्रामीण और शहरी निकाय चुनावों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। इससे अधिक संख्या में लोग चुनाव लड़ने के पात्र हो सकेंगे।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठा रही है, जबकि सरकार का तर्क है कि यह सामाजिक समानता और समान अवसर के लिए जरूरी था।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का असर आने वाले स्थानीय चुनावों में देखने को मिल सकता है।


निष्कर्ष:

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के बयान ने राजस्थान की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए राजनीतिक हमला बोला, तो दूसरी ओर दो बच्चों की बाध्यता हटाने के फैसले को जागरूकता और समानता से जोड़ा।

अब देखना होगा कि विपक्ष इस बयान का किस तरह जवाब देता है और यह मुद्दा आगामी चुनावी परिदृश्य को कितना प्रभावित करता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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