सादुल क्लब में प्रस्तावित शूटिंग रेंज में कुल 17 मशीनें स्थापित की जाएंगी। इनमें 15 मशीनें ट्रैप शूटिंग और दो मशीनें स्कीट शूटिंग के लिए इस्तेमाल होंगी। इन मशीनों को इंग्लैंड से मंगवाया गया है। इन्हें स्थापित करने के लिए इंग्लैंड के इंजीनियर केविन और जोस की सेवाएं लेने की योजना है।
इस सुविधा के शुरू होने से बीकानेर के खिलाड़ियों को अपने शहर में ही आधुनिक संसाधनों के साथ निशानेबाजी का प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है।
बीकानेर और निशानेबाजी का रिश्ता लंबे समय से गौरवशाली रहा है। महाराजा करणी सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धियों से शहर को पहचान दिलाई। वहीं, राज्यश्री कुमारी ने भी निशानेबाजी में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। दोनों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
अब सादुल क्लब की इस पहल को उसी खेल विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा।
सादुल क्लब में वर्तमान में करीब 300 से 400 बच्चे विभिन्न खेलों का अभ्यास कर रहे हैं। ऐसे में शूटिंग रेंज विकसित होने से क्लब की खेल सुविधाओं का विस्तार होगा और निशानेबाजी में रुचि रखने वाले युवाओं को नया अवसर मिल सकता है।
क्लब प्रबंधन का उद्देश्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधनों की कमी के कारण पीछे नहीं रहने देना और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक स्तर के प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना है।
शूटिंग रेंज को शुरू करने से पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा इसका निरीक्षण किया जाएगा। तकनीकी मानकों के अनुरूप स्वीकृति मिलने के बाद यहां विधिवत प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है।
खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए देश के अनुभवी शूटिंग कोच की सेवाएं ली जाएंगी। जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच भी बुलाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, क्लब की ओर से प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ियों को बंदूकें उपलब्ध कराने की भी योजना है।
इस पहल से बीकानेर के खिलाड़ियों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए बेहतर आधार मिल सकता है। 2028 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना इस योजना का अहम उद्देश्य बताया जा रहा है।
हालांकि, शूटिंग रेंज की शुरुआत तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी। यदि परियोजना निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है, तो बीकानेर निशानेबाजी प्रशिक्षण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
बीकानेर की ऐतिहासिक खेल विरासत अब नई पीढ़ी के सपनों से जुड़ने जा रही है। सादुल क्लब की यह पहल सफल होती है, तो मरुधरा की धरती से भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नए निशानेबाज सामने आने की उम्मीद बढ़ेगी।
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