SMS अस्पताल प्रशासन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि अटैच अस्पतालों से गंभीर मरीजों को बिना पूर्व सूचना दिए इमरजेंसी में भेजा जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों और स्टाफ को अचानक गंभीर मरीजों के पहुंचने पर इलाज, बेड और आईसीयू की व्यवस्था करने में दिक्कत होती है।
इन शिकायतों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने नई SOP तैयार कर लागू करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत अटैच अस्पतालों की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की आवश्यक जांच और प्रारंभिक उपचार करना होगा। यदि मरीज की स्थिति ऐसी है कि उसे SMS अस्पताल में उच्चस्तरीय उपचार की जरूरत है, तो उसे रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल के चिकित्सकों को मरीज की स्थिति की जानकारी देनी होगी।
इसके साथ ही मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, की गई जांचों की रिपोर्ट और दिए गए उपचार का विवरण निर्धारित फॉर्मेट में भरकर भेजना होगा, ताकि SMS अस्पताल में पहुंचते ही चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार शुरू कर सकें।
अस्पताल के इमरजेंसी स्टाफ के अनुसार, हाल ही में जनाना अस्पताल से तीन मरीज बिना पूर्व सूचना के SMS अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे थे। स्टाफ का कहना है कि तीनों मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण तत्काल उपचार और जरूरत पड़ने पर आईसीयू की व्यवस्था करनी पड़ी। एक साथ गंभीर मरीजों के पहुंचने से इमरजेंसी की व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
नई SOP लागू होने के बाद रेफरल प्रक्रिया को व्यवस्थित करने, मरीजों के उपचार में देरी रोकने और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले सूचना देने की व्यवस्था के साथ आपात स्थिति में तत्काल उपचार और मरीज की सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी होगा।
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