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शहरी सीमा में आए गांवों की जमीन का कन्वर्जन अब कैसे होगा? सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

जयपुर: राजस्थान में पिछले साल मार्च महीने में शहरी सीमा में शामिल किए गए राजस्व गांवों की कृषि भूमि (एग्रीकल्चर जमीन) के कन्वर्जन को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब राज्य सरकार ने इस भ्रम को खत्म करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार के तीन अहम विभागों—राजस्व विभाग, नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग—के प्रमुखों ने इस संबंध में एक संयुक्त आदेश (ज्वाइंट सर्कुलर) जारी किया है।

सरकारी सर्कुलर के अनुसार, 18 मार्च 2025 को प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों के राजस्व गांवों को शहरी सीमा यानी नगरीय निकाय क्षेत्र में शामिल किया गया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा था कि इन गांवों की एग्रीकल्चर जमीन का कन्वर्जन अब जिला प्रशासन करेगा या संबंधित नगरीय निकाय। इसी को लेकर सरकार ने अब स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

अब कन्वर्जन किसके अधीन होगा?

नए आदेश के तहत 18 मार्च 2025 के बाद शहरी सीमा में शामिल हुए राजस्व गांवों की जमीनों का कन्वर्जन अब संबंधित नगर पालिका, नगर परिषद, यूआईटी या विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाएगा। यानी भविष्य में ऐसे सभी नए आवेदन नगरीय निकायों के पास ही स्वीकार किए जाएंगे।

पुराने आवेदनों पर क्या होगा?

सरकार ने उन मामलों के लिए भी स्पष्ट नियम तय किए हैं, जिनमें आवेदन पहले ही किया जा चुका है।
सर्कुलर के मुताबिक, यदि 18 मार्च 2025 से पहले एग्रीकल्चर जमीन के कन्वर्जन के लिए आवेदन जिला प्रशासन स्तर (कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम या तहसीलदार) के पास पहुंच चुका था और:

  • उस पर कार्यवाही हो चुकी है

  • मांग राशि (कन्वर्जन शुल्क) आधी या पूरी जमा हो चुकी है

तो ऐसे मामलों में पूरी आगे की कार्यवाही जिला प्रशासन द्वारा ही पूरी की जाएगी। हालांकि, इन प्रकरणों में आगे निर्माण से जुड़े नियम नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के नए बिल्डिंग बायलॉज और टाउनशिप पॉलिसी के अनुसार लागू होंगे।

बिना कार्यवाही वाले आवेदन होंगे निरस्त

वहीं, जिन आवेदनों पर 18 मार्च 2025 से पहले आवेदन तो कर दिया गया था, लेकिन:

  • कोई कार्यवाही नहीं हुई

  • मांग राशि जारी नहीं की गई

ऐसे सभी आवेदन निरस्त माने जाएंगे। इन मामलों में आवेदकों को अब दोबारा संबंधित नगरीय निकाय में नए सिरे से आवेदन करना होगा।

क्यों जरूरी थी यह गाइडलाइन?

सरकार के अनुसार, शहरी सीमा विस्तार के बाद भूमि उपयोग, निर्माण नियम और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर स्पष्टता जरूरी थी। नई गाइडलाइन से न सिर्फ आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि भूमि रूपांतरण से जुड़े मामलों में एकरूपता भी आएगी।


निष्कर्ष:

शहरी सीमा में शामिल हुए राजस्व गांवों की एग्रीकल्चर जमीन के कन्वर्जन को लेकर सरकार ने साफ नियम तय कर दिए हैं। पुराने मामलों को जिला प्रशासन निपटाएगा, जबकि नए मामलों में नगरीय निकाय जिम्मेदार होंगे। अब देखना होगा कि ये नई गाइडलाइन जमीन मालिकों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कितनी राहत लेकर आती है या आगे नए सवाल खड़े करती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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