शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू होंगे। मंगला झांकी के दर्शन सुबह 4 बजे से 5:15 बजे तक होंगे। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा।
इस विशेष अवसर पर ठाकुर श्रीजी को सफेद जरी-गोटे की पार्चा जामा पोशाक धारण कराई जाएगी। फूलों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा और पूर्णिमा का विशेष मुकुट पहनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा पर भगवान के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
शाम को संध्या झांकी के दौरान शरद उत्सव की विशेष सजावट देखने को मिलेगी। ठाकुर श्रीजी के लिए शरद की खाट सजाई जाएगी, जिसमें चौसर और शतरंज की झांकी के दर्शन होंगे। भगवान को माला, पान और इत्र अर्पित किए जाएंगे। इस अवसर पर ठाकुर श्रीजी को खीर का विशेष भोग भी लगाया जाएगा।
गोविंददेवजी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय एक महीने तक बदला रहेगा। भक्त मंदिर पहुंचने से पहले नई समय-सारणी का ध्यान रखें।
| दर्शन | समय |
|---|---|
| मंगला झांकी | सुबह 4:00 से 5:15 बजे तक |
| धूप | सुबह 7:45 से 9:00 बजे तक |
| श्रृंगार | सुबह 9:30 से 10:15 बजे तक |
| राजभोग | सुबह 10:45 से 11:15 बजे तक |
| ग्वाल | शाम 5:00 से 5:15 बजे तक |
| संध्या | शाम 5:45 से 6:45 बजे तक |
| शयन | रात 8:00 से 8:15 बजे तक |
शरद पूर्णिमा के इस विशेष पर्व पर जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर सहित शहर के अन्य मंदिरों में भी धार्मिक आयोजन होंगे। श्रद्धालु विशेष श्रृंगार, झांकी और खीर के भोग के दर्शन कर सकेंगे।
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