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राजस्थान राज्यसभा चुनाव: सुनीता बैंसला का नाम चर्चा में

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। सूबे की 3 खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें 8 जून तक सभी प्रत्याशी अपने पर्चे दाखिल कर सकते हैं। इस चुनाव में संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की 2 सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन इन सीटों के लिए भाजपा के संभावित उम्मीदवार के नाम को लेकर राजनीतिक सस्पेंस बना हुआ था। इसी बीच पूर्व आईआरएस अधिकारी सुनीता बैंसला का नाम अचानक चर्चा में आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।

सुनीता बैंसला केवल कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की बेटी होने के कारण ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक गतिविधियों के कारण भी पहचान बनाई है। वे विशेष पिछड़ा वर्ग (MBC) के गुर्जर समाज की पहली महिला आईआरएस अधिकारी हैं। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास करके आयकर विभाग में लंबा और बेदाग करियर जिया। अपने सेवाकाल में उन्होंने जयपुर में प्रिंसिपल कमिश्नर और बाद में आयकर मुख्य आयुक्त जैसे उच्च पदों पर कार्य किया। हाल ही में वे इस उच्च प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुई हैं और अब सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के निधन (मार्च 2022) के बाद सुनीता बैंसला उनके सामाजिक कार्यों और वैचारिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने अपने पिता के विचारों और जीवन दर्शन को संकलित कर 'हिम्मत, मेहनत और नियत' नामक पुस्तक लिखी, जिसका विमोचन पूर्व सेना प्रमुख और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वी.के. सिंह द्वारा किया गया। इसके अलावा उन्होंने भारतीय सेना पर आधारित 'एक सैनिक की डायरी' के संपादन में भी मुख्य भूमिका निभाई।

सुनीता बैंसला ग्रामीण और विशेष रूप से MBC बहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार पर सक्रिय हैं। उनका मुख्य ध्यान बालिकाओं की उच्च शिक्षा, ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास और फिजूलखर्च को रोककर समाज को कर्जमुक्त बनाना है। उनके प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक सक्रियता के कारण युवाओं और महिलाओं के बीच उनका प्रभाव काफी मजबूत है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा आलाकमान द्वारा सुनीता बैंसला के नाम पर गंभीरता से विचार करने के पीछे तीन रणनीतिक कारण हैं:

  1. MBC वर्ग और गुर्जर समाज को संदेश – उनके नाम से इस प्रभावी वोट बैंक को सकारात्मक राजनीतिक संदेश मिलेगा।
  2. महिला प्रतिनिधित्व और शिक्षित चेहरा – उच्च प्रशासनिक अनुभव वाली महिला उम्मीदवार से पार्टी की 'क्लीन और एजुकेटेड' छवि मजबूत होगी।
  3. पारिवारिक संतुलन और राष्ट्रीय नेतृत्व का भरोसा – सुनीता बैंसला का परिवार देशभक्त और अनुशासित पृष्ठभूमि वाला है, जिसमें भाईयों ने भारतीय सेना और राजनीतिक क्षेत्र में उच्च पदों पर सेवा दी है।

इस प्रकार सुनीता बैंसला का नाम केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर भाजपा के उच्च सदन में भेजे जाने की संभावना बनाता है। उनके प्रशासनिक अनुभव, सामाजिक सक्रियता और पारिवारिक पृष्ठभूमि उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में प्रभावी और मान्य चेहरा बनाती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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