Download App Now Register Now

भारत को मिलने वाला है सोने का नया खजाना? ऑस्ट्रेलिया में ₹13 हजार करोड़ की गोल्ड रश, दुनिया के 20% सोने का भंडार

भारत के लिए क्यों अहम है ऑस्ट्रेलिया की सोने की खदानें? अभी 82% जरूरत आयात से पूरी करता है भारत, नई सप्लाई से बढ़ सकते हैं विकल्प

सोने की कीमतों में तेजी के बीच ऑस्ट्रेलिया से भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ सकती है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खदानें खोजने के लिए कंपनियों ने रिकॉर्ड स्तर पर निवेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में सोने की खोज पर करीब 13 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए। माना जा रहा है कि अगर नई खदानों में बड़े भंडार मिलते हैं और उत्पादन बढ़ता है, तो आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए सोने का एक अहम सप्लायर बन सकता है।

भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल है। यहां शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के लिए सोने की भारी मांग रहती है। लेकिन घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण भारत को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज की बढ़ती गतिविधियां भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

ऑस्ट्रेलिया में क्यों मची सोने की खोज की होड़?

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। यहां सोने के नए भंडार तलाशने के लिए खनन कंपनियां लगातार निवेश बढ़ा रही हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया इस अभियान का प्रमुख केंद्र है, जहां सोने की खोज पर भारी रकम खर्च की जा रही है। नई खदानों की तलाश के लिए ड्रिलिंग मशीनों और आधुनिक तकनीक की मांग भी बढ़ रही है।

अनुमानों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में करीब 13 हजार टन सोने के संसाधन मौजूद हैं। यह दुनिया के कुल सोना संसाधनों का लगभग 20 प्रतिशत बताया जाता है। हालांकि, किसी क्षेत्र में मौजूद संसाधनों और आर्थिक रूप से खनन योग्य सोने की मात्रा में अंतर होता है। हर भंडार से सोना निकालना व्यावहारिक या लाभदायक हो, यह जरूरी नहीं है।

जंग और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना बना कंपनियों की पसंद

दुनियाभर में भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के कारण सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। मांग और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच खनन कंपनियां नए भंडार खोजने पर ज्यादा पैसा लगा रही हैं।

ऑस्ट्रेलिया में जून 2026 की तिमाही के दौरान सोने की खोज पर सबसे ज्यादा खर्च किया गया। इसके मुकाबले लौह अयस्क, तांबा, निकल, जस्ता, सीसा और कोयले की खोज पर कम राशि खर्च हुई। इससे संकेत मिलता है कि खनन क्षेत्र में कंपनियों का ध्यान सोने के नए संसाधन तलाशने पर केंद्रित है।

दुनिया के सोना उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया की बड़ी हिस्सेदारी

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2025 में करीब 314 टन सोने का उत्पादन किया, जबकि दुनियाभर में कुल उत्पादन लगभग 3,300 टन रहा। इस तरह वैश्विक उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी करीब 9.5 प्रतिशत रही।

अगर नई खदानें मिलती हैं और मौजूदा खदानों का उत्पादन बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में सोने की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसका फायदा उन देशों को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत पूरी करने के लिए सोने का आयात करते हैं।

भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया क्यों बन सकता है अहम?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। फिलहाल भारतीय बाजार में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बताई जाती है। ऐसे में वहां से आयात बढ़ने पर भारत को सोना खरीदने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।

इसके तीन बड़े फायदे हो सकते हैं:

  • आयात के विकल्प बढ़ेंगे: भारत कुछ चुनिंदा सप्लाई मार्गों और बाजारों पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

  • सप्लाई में विविधता आएगी: अंतरराष्ट्रीय तनाव या परिवहन संबंधी बाधाओं के समय दूसरे स्रोत उपयोगी हो सकते हैं।

  • कारोबार के नए अवसर बनेंगे: भारतीय आयातकों और ऑस्ट्रेलियाई खनन कंपनियों के बीच व्यापार बढ़ने की संभावना बन सकती है।

पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान सोने की सप्लाई और परिवहन पर पड़ने वाले असर ने भी वैकल्पिक स्रोतों की अहमियत को सामने रखा है।

क्या ऑस्ट्रेलिया से सोना आने पर भारत में कीमतें घटेंगी?

यह सबसे बड़ा सवाल है। ऑस्ट्रेलिया में नई खदानें मिलने या उत्पादन बढ़ने से भारत में सोना अपने आप सस्ता नहीं हो जाएगा। घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, परिवहन लागत और स्थानीय मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं।

अगर वैश्विक स्तर पर सोने की सप्लाई बढ़ती है और मांग उसी अनुपात में नहीं बढ़ती, तो कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन यदि युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता या निवेश की मांग के कारण सोने की मांग बढ़ती रहती है, तो उत्पादन में वृद्धि के बावजूद कीमतें ऊंची रह सकती हैं।

भारत की सोने की जरूरत कैसे पूरी होती है?

भारत में सोने की मांग मुख्य रूप से आयात, पुराने सोने की रिसाइक्लिंग और घरेलू खनन से पूरी होती है। देश में उत्पादन सीमित होने के कारण आयात की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। पुराने गहनों को बेचने या एक्सचेंज करने से मिलने वाला सोना भी बाजार में दोबारा इस्तेमाल होता है।

यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े उत्पादक देश में नए भंडार की खोज भारत के लिए महत्वपूर्ण बन सकती है। हालांकि, नई खदानों की खोज से लेकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने तक कई साल लग सकते हैं।

कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता निवेश भारत के लिए भविष्य में सप्लाई के नए अवसर खोल सकता है। लेकिन इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि नई खदानों से कितना सोना निकलता है, उत्पादन लागत कितनी रहती है और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार कितना बढ़ता है।

Written By

DESK HP NEWS

Hp News

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
सीकर में ईदगाह चौराहे से जैन भवन तक वन-वे व्यवस्था लागू, गलत दिशा में जाने पर पंचर होगा टायर | जयपुर पंचायत चुनाव: सुबह 10 बजे तक 14.70% मतदान, 22 जिला परिषद और 146 पंचायत समिति वार्डों में वोटिंग | राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: सुबह 10 बजे तक बीकानेर में 14.78% मतदान, कई जगह EVM में खराबी | टेलीकॉम सेक्टर में नई तकनीकों की टेस्टिंग होगी आसान, सरकार ने जारी किए नए नियम | पंचायत चुनाव के पहले चरण में EVM में खराबी, जयपुर के कालवाड़ में 45 मिनट रुका मतदान | जयपुर में कांग्रेस का तीन दिन से जारी धरना खत्म, रितु बराला मामले में पुलिस से बनी सहमति; अब अदालत जाएगी कांग्रेस | दिल्ली: प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप योजना के तहत जवानों के बच्चों को मिलेगी आर्थिक मदद, 31 अक्टूबर तक आवेदन का मौका | पुलिस शहीद दिवस: जोधपुर में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि, एक साल में देशभर के 154 पुलिसकर्मियों ने दिया बलिदान | राजस्थान में बदला मौसम, बारिश-ओलों के बाद फिर अलर्ट; 24 अक्टूबर से सक्रिय होगा नया वेदर सिस्टम | कोटा नाव हादसा: कोटा में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नाव पलटी, चार लापता लोगों की तलाश दूसरे दिन भी जारी |