नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद कमजोर हो गया है, लेकिन इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 30 अक्टूबर 2026 के अपडेट के अनुसार, चक्रवात अर्नब का अवशेष सिस्टम 29 अक्टूबर की शाम तक कमजोर होकर मध्य छत्तीसगढ़ और उससे सटे ओडिशा के ऊपर अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) में बदल गया था। इसके अगले 24 घंटों में उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा में बढ़ते हुए और कमजोर होने की संभावना जताई गई।
इसी बीच दक्षिण अंडमान सागर में एक नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है। इसके 31 अक्टूबर के आसपास डिप्रेशन में बदलने और आगे पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में नवंबर के शुरुआती दिनों में दक्षिण भारत और पूर्वी तटीय क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं।
चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट पर दस्तक दी थी। इस दौरान यह बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में था।
NDTV की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, तट से टकराते समय हवा की अधिकतम रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई।
तूफान के कारण विशाखापत्तनम, अनकापल्ली, काकीनाडा, कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी में नुकसान की खबरें सामने आईं। अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की मौत की सूचना दी गई। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी भी सामने आई।
तूफान के पहुंचने से पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
चक्रवात अर्नब का असर ओडिशा में भी व्यापक रूप से देखने को मिला। राज्य के दक्षिणी जिलों में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया और सड़क यातायात प्रभावित हुआ।
29 अक्टूबर सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में दर्ज बारिश के प्रमुख आंकड़े:
| स्थान | बारिश |
|---|---|
| पत्रापुर, गंजाम | 546 मिमी |
| सोराडा | 503 मिमी |
| महेंद्रगढ़ | 458 मिमी |
| उदयगिरी | 462 मिमी |
| कोरापुट | 188 मिमी |
| गंजाम | 161 मिमी |
| गजपति | 135 मिमी |
इन आंकड़ों से ओडिशा में बारिश की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मौसम विभाग ने ओडिशा के कुछ हिस्सों में 1 नवंबर को भारी बारिश और 2 नवंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
आंध्र प्रदेश के तट से जमीन की ओर बढ़ने के बाद चक्रवात की ताकत धीरे-धीरे कम होती गई।
मौसम विभाग के अनुसार, 29 अक्टूबर को यह सिस्टम पहले डीप डिप्रेशन और फिर डिप्रेशन में कमजोर हुआ। 29 अक्टूबर शाम 5:30 बजे तक यह मध्य छत्तीसगढ़ और उससे लगे ओडिशा के ऊपर Well Marked Low Pressure Area बन गया था।
अब इसके उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा में आगे बढ़ने और कमजोर होने की संभावना है।
इसका मतलब यह है कि अर्नब अब सक्रिय चक्रवाती तूफान नहीं है, लेकिन इसके अवशेष सिस्टम से बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
राजस्थान में 30 अक्टूबर को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के जयपुर केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में बादल, गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
इन संभागों में बारिश की संभावना:
जयपुर संभाग
भरतपुर संभाग
अजमेर संभाग
कोटा संभाग
उदयपुर संभाग
जयपुर और आसपास के जिलों में चेतावनी:
जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सीकर, झुंझुनूं, टोंक और कोटपुतली-बहरोड़ सहित कई जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि का भी खतरा है।
कोटा और उदयपुर संभाग:
कोटा, बारां, झालावाड़, उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद और सलूंबर के कुछ हिस्सों में बादल और बारिश की गतिविधियां हो सकती हैं।
पश्चिमी राजस्थान:
जोधपुर, नागौर, पाली, जालौर और चूरू के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। जबकि बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है।
31 अक्टूबर को पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। 1 नवंबर से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 30 अक्टूबर को बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की आशंका भी जताई है।
तेज हवाओं के झोंके 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं और कुछ स्थानों पर इनकी रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है।
29 अक्टूबर की रात दिल्ली के कई हिस्सों में बारिश हुई। इसके बाद तापमान में गिरावट और वायु गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया।
हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में भी 30 अक्टूबर को मौसम सक्रिय रहने की संभावना है।
कई स्थानों पर बादल छाने, बारिश, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की चेतावनी भी दी गई है।
किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि अचानक बारिश और ओलावृष्टि से खुले में रखी फसल तथा कृषि उत्पाद प्रभावित हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में भी मौसम विभाग ने बारिश की चेतावनी दी है।
उत्तर प्रदेश: पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है।
बिहार: उत्तरी बिहार के कुछ स्थानों पर 30 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
झारखंड के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर विदर्भ में भी कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी मौसम विभाग ने बारिश को लेकर सतर्कता जताई है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
ओडिशा में अर्नब के प्रभाव के बाद भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। खासकर दक्षिणी जिलों में 1 से 3 नवंबर के दौरान मौसम पर नजर रखने की जरूरत होगी।
चक्रवात अर्नब के कमजोर होने के बीच मौसम विभाग ने एक नई मौसम प्रणाली को लेकर निगरानी बढ़ा दी है।
29 अक्टूबर को दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बना था। IMD के 30 अक्टूबर सुबह 6 बजे के समुद्री बुलेटिन के अनुसार, इसके 31 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार के आसपास डिप्रेशन में केंद्रित होने की संभावना है।
इसके बाद यह पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़कर आंध्र प्रदेश के तट की ओर जा सकता है।
नए सिस्टम से संभावित प्रभाव:
1 नवंबर से ओडिशा के दक्षिणी जिलों में बारिश बढ़ सकती है।
2 से 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।
2 से 3 नवंबर को तटीय कर्नाटक, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश की संभावना है।
3 से 4 नवंबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
तेलंगाना में 1 और 2 नवंबर को तेज गरज-चमक के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है।
अभी इस नए सिस्टम को चक्रवात घोषित नहीं किया गया है। यह फिलहाल निम्न दबाव का क्षेत्र है और इसके आगे विकसित होने पर मौसम विभाग की अगली चेतावनियां महत्वपूर्ण होंगी।
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कुछ रेल मार्गों पर जलभराव की स्थिति पैदा हुई।
ईस्ट कोस्ट रेलवे के अंतर्गत कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या शॉर्ट टर्मिनेट किया गया। विशाखापत्तनम और आसपास के रेल सेक्शन में पानी का स्तर बढ़ने से रेल परिचालन प्रभावित हुआ।
30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक कुछ ट्रेनों के संचालन में बदलाव की सूचना दी गई है। यात्रियों को यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट और NTES पर ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह दी जाती है।
तूफान के दौरान विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा के लिए कुछ उड़ानें भी रद्द की गई थीं।
मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए आम लोगों और किसानों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान में जाने से बचें।
बिजली गिरने के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों।
तेज हवाओं में कमजोर इमारतों और अस्थायी ढांचों से दूरी रखें।
किसान खुले में रखे अनाज और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें।
समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले लोग मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोग स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर ध्यान दें।
| तारीख | प्रमुख मौसम गतिविधियां |
|---|---|
| 30 अक्टूबर | राजस्थान, दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब, यूपी, बिहार और पूर्वी भारत में बारिश, आंधी और कुछ स्थानों पर ओले |
| 31 अक्टूबर | दक्षिण अंडमान सागर का सिस्टम डिप्रेशन बनने की संभावना |
| 1 नवंबर | ओडिशा के दक्षिणी जिलों में बारिश, राजस्थान में मौसम शुष्क होने के संकेत |
| 2 नवंबर | आंध्र प्रदेश, ओडिशा और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश |
| 3 नवंबर | तटीय आंध्र, कर्नाटक, केरल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश |
| 4 नवंबर | तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश की संभावना |
निष्कर्ष: चक्रवात अर्नब कमजोर जरूर हो गया है, लेकिन इसके बाद भी देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। राजस्थान और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बदल रहा है, जबकि दक्षिण अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र नवंबर की शुरुआत में एक नई मौसमी चुनौती पैदा कर सकता है। मौसम विभाग की आगामी चेतावनियां और स्थानीय प्रशासन के निर्देश इस दौरान बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।
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