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RGHS में निजी अस्पतालों की अनियमितता का खुलासा, अधिक क्लेम के लिए मरीजों को बार-बार बुलाने का आरोप

जयपुर, 21 अगस्त। राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) में निजी अस्पतालों द्वारा अनियमित तरीके से क्लेम प्राप्त करने के मामले सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि 2 हजार रुपये से अधिक लागत वाली जांचों के लिए लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से बचने के उद्देश्य से कुछ निजी अस्पतालों ने मरीजों को एक ही बीमारी के इलाज के लिए 3 से 4 बार अस्पताल बुलाकर अलग-अलग जांचें कराईं।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने शुक्रवार को बताया कि RGHS के सतत डेटा विश्लेषण के दौरान ऐसे मामलों की पहचान हुई है। प्रारंभिक तौर पर एक माह में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए हैं। इन मामलों में प्रदेश के करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में आए हैं।

जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और अलवर में सबसे अधिक मामले

अधिकारियों के अनुसार ऐसे प्रकरण प्रदेश के कई हिस्सों में सामने आए हैं, लेकिन जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर में इनकी संख्या सबसे अधिक पाई गई है। विभाग अब संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों के रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रहा है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में एक ही बीमारी से संबंधित जांचों को अलग-अलग समय पर कराया गया। इससे मरीजों को उपचार और जांच के लिए बार-बार अस्पताल जाना पड़ा।

महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को भी हुई परेशानी

RGHS की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि जांचों को अलग-अलग कराने के कारण मरीजों को अनावश्यक रूप से अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। इनमें महिलाओं और बुजुर्ग लाभार्थियों के मामले भी शामिल हैं।

विभाग के अनुसार, यदि एक ही बीमारी के लिए आवश्यक जांचों को जानबूझकर अलग-अलग कराया गया, तो इससे मरीजों को अतिरिक्त परेशानी के साथ योजना के दुरुपयोग की आशंका भी पैदा होती है।

अधिक क्लेम और प्री-ऑथराइजेशन से बचने की जांच

प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि कुछ मामलों में जांचों और क्लेम को अलग-अलग करने का उद्देश्य अधिक क्लेम प्राप्त करना अथवा प्री-ऑथराइजेशन की प्रक्रिया से बचना हो सकता है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी सभी मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी अस्पताल या चिकित्सक ने अधिक क्लेम प्राप्त करने या प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जानबूझकर जांचों अथवा दावों को विभाजित किया, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

RGHS में पारदर्शिता और सरकारी धन की सुरक्षा पर जोर

RGHS का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ मरीजों को अनावश्यक जांच और परेशानी से बचाना है। विभाग का कहना है कि योजना में डेटा के लगातार विश्लेषण के जरिए संदिग्ध पैटर्न की पहचान की जा रही है।

सरकार का फोकस योजना में पारदर्शिता बनाए रखने, अनावश्यक जांच को रोकने और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग पर अंकुश लगाने पर है। सामने आए मामलों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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